Rajasthan News: सियासी चमक-धमक और वीआईपी प्रोटोकॉल से दूर, राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tika Ram Jully) की पत्नी गीता देवी (Geeta Devi) का एक अलग ही रूप देखने को मिला. डीग (Deeg) जिले के एक दिवसीय दौरे के दौरान ग्राम दिदावली में उन्होंने जो किया, उसने न केवल ग्रामीणों का दिल जीत लिया, बल्कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों की याद भी दिला दी.
महिलाओं के साथ साझा किया सुख-दुख
दिदावली गांव के प्रवास के दौरान गीता देवी ने किसी खास सुविधा की मांग करने के बजाय गांव की महिलाओं के बीच बैठना पसंद किया. उन्होंने एक साधारण घर के आंगन में जमीन पर बैठकर न केवल आटा गूंथा, बल्कि जलते हुए चूल्हे की आंच पर खुद रोटियां भी सेंकी. मिट्टी के तवे पर रोटियां सेंकती गीता देवी को देख वहां मौजूद ग्रामीण महिलाएं भी उनकी सहजता की कायल हो गईं.
'चूल्हे की रोटी का स्वाद है बेमिसाल'
चूल्हे पर रोटियां बनाने के अपने अनुभव को साझा करते हुए गीता देवी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी जड़ों और परंपराओं को पीछे छोड़ते जा रहे हैं. उन्होंने चूल्हे की धीमी आंच पर पके भोजन को स्वाद और सेहत का असली राज बताया. उनके अनुसार, मिट्टी के तवे और लकड़ी की आंच से मिलने वाला सौंधापन किसी भी आधुनिक किचन में नहीं मिल सकता.
मंदिरों में मत्था टेका, खुशहाली के लिए की प्रार्थना
अपने इस दौरे के दौरान गीता देवी और टीकाराम जूली ने क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन भी किए. उन्होंने दानघाटी मंदिर, पूंछरी के श्रीनाथ जी मंदिर और बांके बिहारी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. परिवार ने गोवर्धन की इस पावन धरा पर प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा.
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