रातोंरात चौराहे पर लगा दी महाराणा की प्रतिमा, सुबह मचा सियासी बवाल

मेवाड़ के शहर राजसमंद में वीर महाराणा राज सिंह के नाम पर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले 'राणा राज सिंह मार्ग' के नामकरण पर खींचतान हुई और अब शहर के सबसे व्यस्त जल चक्की चौराहे पर रात के अंधेरे में बिना अनुमति के राणा राज सिंह की प्रतिमा लगा दी गई.

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रातोंरात चौराहे पर लगा दी महाराणा की प्रतिमा

राजसमंद शहर के प्रमुख चौराहे जलचक्की को सालों पहले जिले की स्थापना करने वाले राणा राज सिंह की मूर्ति लगने के बाद राणा राज सिंह सर्किल का नाम दिया गया. लेकिन यह मूर्ति चौराहे के एक तरफ लगा दी गई थी जिससे यह अपेक्षित नजर आ रही थी. समय बीतने के बाद इस पर सियासत शुरू हुई और स्थानीय लोगों की मांग पर नगर परिषद ने जल चक्की चौराहे पर राणा राज सिंह की बड़ी प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया. नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड होने और विधायक-सांसद भाजपा के होने के चलते दोनों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई. लगातार समय बीतने के साथ ही यह राजनीति का अखाड़ा बन गया. आखिर चौराहे पर मूर्ति बनाने के लिए प्लेटफॉर्म बनाने के बाद रोक दिया गया और 3 दिन पूर्व रातों-रात यहां मूर्ति स्थापित कर दी गई, लेकिन इसका अनावरण नहीं किया गया.

रात के अंधेरे में बिना अनुमति लगाई प्रतिमा

इससे पूर्व 50 फीट रोड पर 'राणा राजसिंह मार्ग' के नामकरण पर खींचतान हुई, फिर इसी गुत्थी में नगर परिषद आयुक्त पर स्याही तक फेंक दी गई. इस मामले में गिरफ्तारी भी हुई और जमकर सियासी खींचतान भी. जिसके कारण नगर परिषद के अधिकारियों पर गाज गिरी और उनके स्थानांतरण कर दिए गए. अब यह चौराहा एक नया और नाटकीय मोड़ ले चुका है. इस बार विवाद का केंद्र बना है, शहर का व्यस्त जल चक्की' चौराहा. जहां रात के अंधेरे में बिना अनुमति के राणा राजसिंह की प्रतिमा वहां लगा दी. 

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मूर्ति लगाने के सवाल पर क्या बोले आला अधिकारी?

नगरपरिषद के पूर्व आयुक्त ललितसिंह देथा का तर्क था कि अनुमति की फाइल भेजी जा चुकी है. अगर अंतिम अनुमति नहीं मिलती है तो प्रतिमा यहां नहीं लगेगी. यदि मिल जाती है तो स्थापित की जाएगी. राणा राजसिंह की मूर्ति लगाने के सवाल पर वर्तमान आयुक्त विजेश मंत्री का कहना है कि इस मामले का पता करता हूं, मुझे कोई जानकारी नहीं है. रात के अंधेरे में राणा राजसिंह की प्रतिमा लगाने के संवाल पर जिला कलक्टर अरूण कुमार हसीजा ने कहा कि आयुक्त से बात हुई. जिन्होंने कहा कि ये प्रतिमा हमने लगाई है.

विवाद की मुख्य वजह यह है कि संभागीय आयुक्त और सरकार की अंतिम प्रशासनिक हरी झंडी के बिना रातों-रात लगा दी गई महाराणा राजसिंह की प्रतिमा. बिना आधिकारिक अनुमति के, रात के अंधेरे में मूर्ति स्थापित कर दी गई. देखते ही देखते इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं.

मूर्ति शिलान्यास कार्यक्रम हो चुका है रद्द 

नगर परिषद ने इस पूरी परियोजना के लिए 40 लाख का एस्टीमेट तैयार किया था. जिसमें करीब 25 लाख की ग्रेनाइट प्रतिमा और 15 लाख तिराहे के सौंदर्गीकरण के लिए प्रस्तावित थे. तमाम तकनीकी आपत्तियों और विचाराधीन फाइल के बावजूद, परिषद प्रशासन ने सौंदर्याकरण के नाम पर आनन-फानन में फाउंडेशन का निर्माण शुरू कराया और अब बिना अनुमति मूर्ति लगाकर नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं. 

नगरीय शासन विभाग के 1 मार्च 1997 के आदेशानुसार, ऐसे चौराहो या तिराहों पर प्रतिमाएं नहीं लगाई जा सकतीं जो यातायात व्यवस्था को प्रभावित करें. वरिष्ठ नगर नियोजक (उदयपुर जोन) ने साफ रिपोर्ट दी थी कि जल चक्की तिराहा कांकरोली और नाथद्वारा रोड जैसे बेहद व्यस्त मार्गों का मुख्य जंक्शन है. यहां प्रतिमा लगाने से सड़क की चौड़ाई घटेगी, गाडियों का दबाव बढेगा और आसपास के व्यापारिक प्रतिष्ठानों व यातायात पर बुरा असर पड़ेगा. विभाग ने वैकल्पिक जगह तलाशने की सलाह दी थी.

मई को जब उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी का दौरा प्रस्तावित था, तब विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी और कुछ अधिकारियों ने इस जगह का शाम के समय मुआयना भी किया था. उप मुख्यमंत्री को यहाँ शिलान्यास करना था, लेकिन जरूरी मंजूरियाँ न मिलने के कारण एन मौके पर यह कार्यक्रम रद्द करना पड़ा.

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