बीजेपी नेता राकेश भाटी नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हो गए. राकेश भाटी की पत्नी पाली नगर परिषद से निवर्तमान सभापति हैं. वे खुद पाली से लगातार 5 बार पार्षद रहे हैं, भाजपा के जिला महामंत्री भी रहे हैं. ऐसे में भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल होना भाजपा के लिए बड़ा झटका और कांग्रेस के लिए बड़ी रणनीतिक बढ़त है.
"राकेश भाटी को इज्जत नहीं मिली"
कांग्रेस से पाली विधायक भीमराज भाटी ने कहा, "ये भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और नरेंद्र मोदी की जाति से हैं, इसके बाद भी उन्हें वहां इज्जत नहीं मिली, इसलिए ये भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस में आए हैं, हमें पूरा विश्वास है, जनता का रुझान परिणाम वाले दिन देखिएगा."
राकेश भाटी ने कहा, "वहां पर स्थानीय रूप से मैं परेशान हो गया. ढाई साल से काम नहीं हो रहे. प्रभारी मंत्री बातचीत नहीं करते और बंद कमरों में बैठक होती है, ऐसा पहली बार हुआ है."
"मदन राठौड़ से कोई नाराजगी नहीं"
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जी से कोई नाराजगी नहीं है, वहीं कांग्रेस में मेयर पद के लिए हुए किसी समझौते की बात पर बोले कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है, वे अपने मन से आए हैं, उनकी कोशिश है ज्यादा से ज्यादा पार्षद जीतें, उसके बाद मेयर तो पार्षद तय करेंगे. मैं चाहता हूं कि पाली का विकास हो. इस बार पाली के नगर निगम बनने के बाद पहली बार वहां नगर निगम के चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में पाली बड़ा निकाय बन गया है. चुनाव से पहले भाजपा के एक बड़े नेता का कांग्रेस का दामन थामना भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
पूर्व विधायक ज्ञानचंद पर लगाए गंभीर आरोप
राकेश भाटी ने भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख पर भी आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पाली में भाजपा बची ही नहीं है. ज्ञानचंद पारख अपनी प्राइवेट कंपनी चला रहे हैं, और कार्यकर्ता परेशान हैं. हालांकि, राकेश भाटी ने कहा कि मदन राठौड़ ने भी कहा था कि राकेश को भाजपा का दुपट्टा पहना दो, जीत जाएगा, लेकिन पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने उनकी बात नहीं मानी.
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