MGD गर्ल्स स्कूल का 82वां स्थापना दिवस, वसुंधरा राजे ने कहा- यह संस्था नहीं क्रांति के लिए हुई थी स्थापित

वसुंधरा राजे ने कहा कि "आठ दशकों से ज़्यादा समय से, MGD उत्कृष्टता, मूल्यों और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में खड़ा है, और इस संस्थान ने भारत को ऐसी महिलाएं दी हैं जिन्होंने पुरानी सोच को तोड़ा है और उम्मीदों को फिर से लिखा है.

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वसुंधरा राजे

Vasundhara Raje: महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल का 82वां स्थापना दिवस शुक्रवार (23 जनवरी) को मनाया गया. इसके समारोह में राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पहुंची थी. राजे ने यहां सभा को संबोधित करते हुए  याद दिलाया कि 1943 में महारानी गायत्री देवी ने इस संस्था की स्थापना "सिर्फ एक संस्था के तौर पर नहीं, बल्कि एक क्रांति के तौर पर" की गई थी. "एक शांत क्रांति जिसने सोच को चुनौती दी, रुकावटों को तोड़ा, और उन दरवाजों को खोला जो लंबे समय से युवा महिलाओं के लिए बंद थे." उन्होंने कहा कि महारानी गायत्री देवी ने "राजस्थान में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, यह साबित करते हुए कि शालीनता और आज़ादी एक साथ रह सकते हैं."

संस्थान ने पुरानी सोच को तोड़ने वाली महिलाएं दी

राजे ने कहा कि "आठ दशकों से ज़्यादा समय से, MGD उत्कृष्टता, मूल्यों और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में खड़ा है, और इस संस्थान ने भारत को ऐसी महिलाएं दी हैं जिन्होंने पुरानी सोच को तोड़ा है और उम्मीदों को फिर से लिखा है. उन्होंने बताया कि MGD की पूर्व छात्राओं में लोकसभा की एक पूर्व स्पीकर, भारतीय नौकरशाही और राजनयिक सेवाओं की वरिष्ठ सदस्य, व्यापार और नागरिक समाज में सफल नेता, एक ओलंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट शामिल हैं.

उन्होंने स्टूडेंट्स को याद दिलाया कि "MGD जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षा पाना एक सौभाग्य है, जो अवसर और ज़िम्मेदारी दोनों साथ लाता है," और इस ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया कि "अपनी शिक्षा का इस्तेमाल खुद आगे बढ़ने, दूसरों को सशक्त बनाने और समाज को वापस देने के लिए करें."

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का ज़िक्र करते हुए, वसुंधरा राजे ने उनके इस विश्वास को याद किया कि "महिलाओं का सशक्तिकरण एक अनिवार्य राज्य नीति होनी चाहिए - सभी के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा" उन्होंने कहा कि यह विज़न राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में झलकता है.

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राजे ने छात्राओं से की अपील

शिक्षा की ताकत को दोहराते हुए, राजे ने कहा, "शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं है - यह एक अधिकार है," जब एक लड़की शिक्षित होती है, तो वह सिर्फ अपनी ज़िंदगी नहीं बदलती; वह समाज की दिशा ही बदल देती है. उन्होंने आखिर में स्टूडेंट्स से अपील की कि "अपनी पढ़ाई, आवाज़ और पहचान का इस्तेमाल दूसरों के लिए जगह बनाने के लिए करें," और उन्हें याद दिलाया कि "जैसे-जैसे आप आगे बढ़ें, दूसरों को भी आगे बढ़ाएं."

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