Ground Report: मध्य पूर्व तनाव का असर हाड़ौती स्टोन इंडस्ट्री पर, एक्सपोर्ट रुका; शिपिंग महंगी

स्टोन फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि एक्सपोर्ट रुकने से उत्पादन भी प्रभावित हो गया है. फैक्ट्री संचालक हेमंत भदौरिया ने बताया कि पहले उनकी फैक्ट्रियों में करीब 80 मजदूर काम करते थे, लेकिन अब काम घटने के कारण केवल 30 मजदूरों से ही काम चलाना पड़ रहा है.

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Kota News: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र की स्टोन इंडस्ट्री पर भी दिखाई देने लगा है. कोटा और आसपास के इलाकों से यूरोप समेत कई देशों में निर्यात होने वाला सैंडस्टोन फिलहाल प्रभावित हो गया है. एक्सपोर्टर्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण शिपिंग लागत बढ़ गई है और बीमा से जुड़ी समस्याओं के चलते माल भेजना जोखिम भरा हो गया है, जिससे करोड़ों रुपये के इस कारोबार पर संकट मंडराने लगा है.

हाड़ौती क्षेत्र, खासतौर पर कोटा, बूंदी और बारां जिलों में सैंडस्टोन इंडस्ट्री हजारों लोगों को रोजगार देती है. हर साल यहां से करीब 30 हजार कंटेनर सैंडस्टोन का निर्यात किया जाता है, जिसका कारोबार लगभग 900 करोड़ रुपये तक पहुंचता है. यह पत्थर खासतौर पर यूरोप के देशों में घरों और गार्डन की सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

सबसे ज्यादा असर शिपिंग सेक्टर पर पड़ा है

उद्योग से जुड़े एक्सपोर्टर्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने का सबसे ज्यादा असर शिपिंग सेक्टर पर पड़ा है. शिपिंग किराया अचानक बढ़ गया है और कई जगहों पर बीमा कंपनियां भी जोखिम के कारण कवरेज देने से बच रही हैं. ऐसे में विदेशों में माल भेजना मुश्किल हो गया है और निर्यात लगभग ठप पड़ने की स्थिति में है.

युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो लोगों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं

सैंडस्टोन एक्सपोर्टर उत्कर्ष कालानी और राहुल पोद्दार का कहना है कि जब दुनिया में युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो लोगों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं. ऐसे समय में लोग सुरक्षा, भोजन और चिकित्सा जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे सजावटी पत्थरों जैसे उत्पादों की मांग पर सीधा असर पड़ता है. उन्होंने सरकार से शिपिंग फेयर को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी की है.

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वहीं स्टोन फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि एक्सपोर्ट रुकने से उत्पादन भी प्रभावित हो गया है. फैक्ट्री संचालक हेमंत भदौरिया ने बताया कि पहले उनकी फैक्ट्रियों में करीब 80 मजदूर काम करते थे, लेकिन अब काम घटने के कारण केवल 30 मजदूरों से ही काम चलाना पड़ रहा है. यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो हाड़ौती की अर्थव्यवस्था और हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.