Mukhyamantri Ayushman Arogya (MAA) Yojana: 'मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना' में गंभीर खामियां सामने आई हैं. पिछले 4 महीनों में 48 करोड़ रुपए से अधिक के इलाज के क्लेम खारिज कर दिए गए हैं. सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और सिस्टम की कमजोरियों के चलते क्लेम रिजेक्शन दर 48.38 प्रतिशत तक पहुंच गई. इस मामले को गंभीर मानते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 28 सरकारी अस्पतालों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर राजस्थान सेवा नियम-1958 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
विभाग को करोड़ों रुपए का नुकसान
विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक, 1 जून 2025 से 30 नवंबर 2025 के बीच एक अस्पताल में 3.45 करोड़ रुपए की बुकिंग की गई. इसमें से केवल 1.28 करोड़ रुपये के क्लेम ही स्वीकृत हुए, जबकि 1.72 करोड़ रुपए के क्लेम रिजेक्ट कर दिए गए. चिकित्सा शिक्षा विभाग का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से राज्य सरकार को हर महीने करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है.
रिजेक्ट होने के बाद दोबारा क्लेम भी नहीं भेजे
चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल
चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया, "अस्पतालों में समय पर और सही तरीके से क्लेम प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. कई मामलों में इलाज से जुड़े दस्तावेज अधूरे भेजे गए तो कई मामलों में तय समय सीमा में क्लेम अपलोड ही नहीं किया गया. बीमा कंपनी के क्लेम खारिज किए जाने के बाद भी कई अस्पतालों ने सुधार कर दोबारा क्लेम भेजने की कोशिश नहीं की."
जयपुर, उदयपुर, अजमेर समेत इन जिलों के हॉस्पिटलों को नोटिस
एसएमएस अस्पताल, जनाना अस्पताल, जेके लोन अस्पताल, महिला चिकित्सालय, गणगौरी और कांवटिया अस्पताल सहित कई बड़े सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा क्लेम खारिज हुए हैं. नोटिस पाने वाले अस्पतालों में जयपुर, बीकानेर, सीकर, चित्तौड़गढ़, अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर और हनुमानगढ़ के सरकारी अस्पताल शामिल हैं.
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