धौलपुर जिले में इस रबी सीजन में सरसों और नगदी फसल आलू की पैदावार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. मौसम की अनियमितता, फसलों में रोगों का प्रकोप और बढ़ती लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. उत्पादन में आई कमी के चलते किसानों को लागत के अनुपात में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है.
सरसों की फसल में 2 क्विंटल तक कमी
किसानों के अनुसार, इस वर्ष प्रति बीघा सरसों की औसत पैदावार में लगभग 2 क्विंटल तक की गिरावट देखी गई है. फसल में तना गलन और फंगीसाइड रोग (फफूंद जनित रोग) के प्रकोप के कारण पौधे समय से पहले सूखने लगे, जिससे दाने भराव पर असर पड़ा. कई क्षेत्रों में फूल और फलियों के विकास पर भी रोग का प्रभाव पड़ा, जिससे कुल उत्पादन घट गया.
आलू की फसल पर झुलसा रोग
नगदी फसल माने जाने वाले आलू में भी इस बार उत्पादन प्रभावित रहा है. किसानों का कहना है कि प्रति बीघा करीब 20 से 30 बैग तक की कमी आई है. आलू की फसल में झुलसा रोग (ब्लाइट) के कारण पत्तियां काली पड़ गई, और कंद का विकास रुक गया. समय पर प्रभावी दवाओं का छिड़काव नहीं हो पाने और बदलते मौसम के कारण रोग तेजी से फैला.
बढ़ती लागत, घटती आमदनी खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है. इसके विपरीत उत्पादन में गिरावट ने किसानों की आमदनी पर सीधा असर डाला है. कई किसानों का कहना है कि इस बार उन्हें लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है.
विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रोग प्रबंधन के लिए समय पर उचित फफूंदनाशी दवाओं का प्रयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मौसम के अनुसार, सिंचाई जरूरी है. साथ ही किसानों को कृषि विभाग से तकनीकी सलाह लेकर ही दवाओं का उपयोग करना चाहिए. कुल मिलाकर, इस बार सरसों और आलू की घटती पैदावार ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है. किसान सरकार से राहत और फसल बीमा दावों के शीघ्र निस्तारण की मांग कर रहे है.
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