राजस्थान: 9वीं और 11वीं के 2 छात्रों ने बनाया रक्षक 01 रोबोट, मानव जैसी आखें, विजन सिस्टम

9वीं और 11वीं में पढ़ने वाले 2 युवा सितारों ने दिखा दिया कि सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखे जा सकते हैं और उन्हें पूरा भी किया जा सकता है. ‘रक्षक-01’ सुरक्षा कर्मियों की मदद कर सकता है, बच्चों की देखभाल में सहायक हो सकता है या किसी आपात स्थिति में अलर्ट जारी कर सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
9वीं और 11वीं के 2 छात्रों ने बनाया रक्षक 01 रोबोट

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है, अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कुछ भी करना संभव है. इसी का एक उदाहरण राजस्थान के नागौर जिले के छोटे से कस्बा के 2 छात्र हैं. कुचेरा में दो होनहार छात्रों ने ऐसे ही करिश्मे को अंजाम दिया है, जिसे देखकर बड़े से बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र भी हैरान रह जाएंगे. कक्षा 9 के मात्र 14 वर्षीय यश शर्मा और कक्षा 11 के 16 वर्षीय नीरज सैनी ने मिलकर एक अत्याधुनिक ह्यूमनॉइड एआई रोबोट ‘रक्षक-01 (RAKSHAK-01)' विकसित कर लिया है. यह रोबोट न सिर्फ मानव जैसी आंखों से देखता है, बातचीत करता है, बल्कि रियल-टाइम में पर्यावरण को समझकर सुरक्षा और निगरानी का काम भी कर सकता है.

मील का पत्थर साबित हो सकता है रोबोट

सीमित संसाधनों, छोटे शहर की सुविधाओं और स्कूली स्तर पर उपलब्ध टूल्स के बावजूद इन दोनों युवा प्रतिभाओं ने पायथन प्रोग्रामिंग, 3डी प्रिंटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए ऐसा रोबोट तैयार किया है, जो भविष्य की तकनीक का मील का पत्थर साबित हो सकता है. यह उपलब्धि न केवल कुचेरा कस्बे बल्कि पूरे नागौर जिले और राजस्थान के लिए गर्व का विषय है. 

Advertisement

यश शर्मा कुचेरा के रहने वाले हैं. उनके पिता जयप्रकाश शर्मा एवीवीएनएल विद्युत विभाग में कार्यरत हैं, जबकि माता एक निजी स्कूल में शिक्षण कार्य करती हैं. मात्र 14 साल की उम्र में यश ने अपनी रुचि को विज्ञान और तकनीक की ओर मोड़ा. दूसरी ओर नीरज सैनी भी कुचेरा के ही निवासी हैं. उनके पिता जितेन्द्र सैनी हैं. 16 वर्षीय नीरज कक्षा 11 में पढ़ते हुए भी तकनीकी नवाचार में गहरी दिलचस्पी रखते हैं.

ह्यूमनॉइड रोबोट है रक्षक 01

दोनों छात्रों ने बताया कि वे लंबे समय से रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में प्रयोग कर रहे थे. स्कूल की लाइब्रेरी, इंटरनेट के सीमित उपयोग और घर पर उपलब्ध पुराने कंपोनेंट्स से उन्होंने यह प्रोजेक्ट शुरू किया. कई रातों की जागरण, ट्रायल-एरर और निरंतर मेहनत के बाद आखिरकार ‘रक्षक-01' तैयार हो सका. ‘रक्षक-01' पूरी तरह से ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसकी डिजाइन और फंक्शनैलिटी देखकर लगता है जैसे कोई साइंस फिक्शन फिल्म का किरदार जिंदगी में आ गया हो.

रोबोट की खास विशेषताएं 

  • मानव जैसी आंखें और विजन सिस्टम: रोबोट में लगी आंखें ऊपर-नीचे तथा दाएं-बाएं घूम सकती हैं. इसमें ऑब्जेक्ट डिटेक्शन और रियल-टाइम विजन कैपेबिलिटी है, जो आसपास के वातावरण को समझकर तुरंत प्रतिक्रिया देती है.
  • लाइव कैमरा और निगरानी: इसमें हाई-क्वालिटी लाइव कैमरा लगा है, जिससे यह रियल-टाइम में वीडियो फीड दे सकता है. सुरक्षा गार्ड की तरह यह संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकता है. 
  • वॉइस कमांड और इंटरैक्शन: वॉइस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए यह आवाज सुनकर निर्देशों का पालन करता है. साथ ही इसमें बुद्धिमान संवाद प्रणाली (Intelligent Conversation System) है, जिससे यह इंसानों से सामान्य बातचीत भी कर सकता है.
  • रोबोट का सिर, गर्दन और हाथ विभिन्न दिशाओं में हिल सकते हैं, जिससे यह अधिक प्राकृतिक और प्रभावी तरीके से काम करता है. 
  • एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम: पायथन प्रोग्रामिंग, ऑब्जेक्ट डिटेक्शन मॉडल्स और वॉइस इंटरैक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर यह रोबोट पर्यावरण को समझता और उसके अनुसार एक्शन लेता है.

छात्रों का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्मार्ट सुरक्षा सिस्टम विकसित करना था जो घर, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थानों में निगरानी के साथ-साथ मानव जैसा संवाद भी कर सके. ‘रक्षक-01' सुरक्षा कर्मियों की मदद कर सकता है, बच्चों की देखभाल में सहायक हो सकता है या किसी आपात स्थिति में अलर्ट जारी कर सकता है.

ऑनलाइन वीडियो देख समझी तकनीक

रोबोट बनाने में मुख्य रूप से 3डी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे इसके पार्ट्स को सटीक आकार दिया जा सका. पायथन भाषा में कोडिंग कर एआई मॉडल्स को इंटीग्रेट किया गया. ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के लिए ओपन सोर्स लाइब्रेरीज और वॉइस इंटरैक्शन के लिए स्पीच रिकग्निशन टूल्स का सहारा लिया गया. चुनौतियां भी कम नहीं थीं. कुचेरा जैसे छोटे कस्बे में एडवांस्ड कंपोनेंट्स आसानी से उपलब्ध नहीं थे. दोनों छात्रों ने ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स, यूट्यूब वीडियोज और ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म्स से समझा. कई बार प्रोटोटाइप फेल भी हुए, लेकिन हार नहीं मानी. कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट पर कई महीनों की मेहनत लगी.

Advertisement

स्थानीय शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस उपलब्धि की सराहना की है. एक स्थानीय इंजीनियर ने कहा, “14-16 साल के बच्चों द्वारा ऐसा रोबोट बनाना वाकई कमाल है. अगर इन्हें सही मार्गदर्शन और फंडिंग मिले तो ये बच्चे देश स्तर पर बड़ा नाम बना सकते हैं.” यश और नीरज का सपना है कि ‘रक्षक-01' को और बेहतर बनाया जाए. वे इसमें और ज्यादा फीचर्स जोड़ना चाहते हैं, जैसे मोबाइल कंट्रोल, ऑटोमैटिक चार्जिंग और ज्यादा एडवांस्ड एआई. वे सरकारी योजनाओं या स्टार्टअप सपोर्ट से मदद लेने की भी सोच रहे हैं ताकि यह रोबोट व्यावसायिक स्तर पर तैयार हो सके.

यह भी पढें- जयपुर में 8वीं तक के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के समय में बदलाव, तेज गर्मी के बाद लिया गया फैसला

Advertisement