कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किडनी प्रभावित प्रसूताओं के इलाज को लेकर चल रहा गतिरोध फिलहाल खत्म हो गया है. प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की समझाइश के बाद सभी प्रसूताएं और उनके परिजन डायलिसिस जारी रखने के लिए तैयार हो गए हैं. करीब दो घंटे चली बैठक में इलाज और भविष्य की प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगभग 75 महीने से भर्ती पांच प्रसूताएं और उनके परिजन किडनी ट्रांसप्लांट की मांग कर रहे हैं. उन्होंने मांग पूरी नहीं होने पर डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया था और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी.
आज, 16 जुलाई को किडनी ट्रांसप्लांट की मांग को लेकर डायलिसिस कराने से इंकार कर रही प्रसूताओं और उनके परिजनों के साथ एडीएम सिटी विनोद कुमार, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन और एडिशनल एसपी सुभाष चंद्र मिश्रा ने करीब दो घंटे तक बैठक की. बैठक के बाद सकारात्मक सहमति बनी और सभी प्रसूताएं डायलिसिस कराने के लिए राजी हो गईं.
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 90 दिन की प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि नियमों के अनुसार किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 90 दिन बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया होती है. इसी प्रक्रिया के तहत जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल साइंस में हर मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता नहीं पड़ती. कई मामलों में नियमित डायलिसिस और उपचार से किडनी की कार्यक्षमता में सुधार भी देखा गया है.
(प्रसूताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेज इच्छामृत्यु की मांग की थी)
बैठक में प्रसूताओं और उनके परिजनों को आश्वस्त किया गया कि इलाज के दौरान उन्हें विशेष श्रेणी में रखकर प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा. प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने बेहतर चिकित्सा सुविधा देने का भरोसा भी दिलाया. बैठक के बाद इलाज को लेकर सहमति बनने से अस्पताल में बना गतिरोध समाप्त हो गया. हालांकि परिजनों ने मुआवजे की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि उपचार के साथ-साथ उन्हें उचित आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाए. फिलहाल प्रशासन की पहल से उपचार सुचारु रूप से जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है.
प्रसूताओं का आरोप
प्रसूताओं और उनके परिजनों का आरोप है कि 4 मई से 8 मई 2026 के बीच वे प्रसव के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल आई थीं. इसके बाद ही इलाज के दौरान उनकी दोनों किडनी फेल हो गईं. इस सप्ताह प्रसूताओं और उनके परिजनों ने दो दिन पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. यह समयसीमा समाप्त होने के बाद अब उन्होंने डायलिसिस कराने से इंकार कर दिया और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की थी.
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