Congress Leader Murder: राजस्थान के अजमेर जिले से एक ऐसा जघन्य और दिल दहला देने वाला पारिवारिक नरसंहार सामने आया है, जिसने रिश्तों की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया है. अजमेर के बोराड़ा क्षेत्र में गुरुवार को जिस घटना को शुरुआती तौर पर एक दर्दनाक सड़क हादसा और कार में अचानक लगी आग माना जा रहा था, वह कुछ घंटे के भीतर अजमेर जिले के इतिहास की सबसे सनसनीखेज 'फैमिली मर्डर मिस्ट्री' बनकर उभरी है. अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के नेतृत्व में गठित विशेष टीमों ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महज चंद घंटों के भीतर इस खौफनाक साजिश की परतें खोल दी हैं. इस खूनी खेल की पटकथा किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि चार दीवारों के भीतर रहने वाले अपनों ने ही लिखी थी.
पुलिस ने इस मामले में मृतक की पहली पत्नी, बेटी और नाबालिग बेटे को हिरासत में लेकर नरसंहार का पर्दाफाश कर दिया है. एक कार, चार लाशें और राख का ढेर यह पूरी कहानी गुरुवार सुबह अराई रोड पर सड़क किनारे धूं-धूं कर जलती एक स्कॉर्पियो कार से शुरू होती है. कार के भीतर से उठती आग की लपटें इतनी वीरान और डरावनी थीं कि आसपास के ग्रामीणों के हौसले पस्त हो गए. जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक कार के भीतर मौजूद चार इंसानी जिस्म कंकाल में तब्दील हो चुके थे.
आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए बीमार मां को अस्पताल ले जाना बताया था और शॉर्ट सर्किट के कारण कार लॉक हो गई, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ. लेकिन, पुलिस के खोजी दिमाग और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को पहली ही नजर में कुछ ऐसा दिखा, जिसने कहानी का रुख 180 डिग्री मोड़ दिया.
दो शादियां और 6 साल से सुलगती नफरत की आग
पुलिस अनुसंधान और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड की जड़ें रामसिंह चौधरी के वैवाहिक जीवन और पारिवारिक कलह से जुड़ी हुई हैं. रामसिंह चौधरी की पहली शादी करीब 20 साल पहले सुनीता से हुई थी, जिससे उनके एक बेटी और एक बेटा हैं.
दूसरी पत्नी सुनीता जिला परिषद सदस्य थी और एलएलबी की तैयारी भी कर रही थी. रूतबे और हक की इस लड़ाई ने परिवार के भीतर गहरे डिप्रेशन और नफरत का रूप ले लिया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह खूनी कलह पिछले कई महीनों से उफान पर थी, जिसका अंत इतना भयावह होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था.
बेरहमी से कत्ल फिर सबूत मिटाने का 'क्राइम थ्रिलर' प्लान
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने किसी 'क्राइम थ्रिलर' फिल्म की तर्ज पर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया था. बुधवार की दरमियानी रात जब रामसिंह, उनकी मां पूसी देवी, दूसरी पत्नी सुरज्ञान और भांजी महिमा सो रहे थे, तभी पहली पत्नी सुनीता ने अपने बच्चों के साथ मिलकर उन पर धारदार और भारी हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमला इतना बर्बर और सुनियोजित था कि चारों को संभलने या चीखने तक का मौका नहीं मिला और उन्होंने तड़प-तड़पकर मौके पर ही दम तोड़ दिया.
चारों की मौत सुनिश्चित करने के बाद असली खेल शुरू हुआ. हत्या को 'हादसे' में बदलने की मास्टर प्लानिंग की गई. हत्यारों ने घर के पास खड़े एक ट्रैक्टर से डीजल निकाला. इसके बाद चारों शवों को घसीटकर स्कॉर्पियो कार में ठूंस दिया गया. घर से करीब 500 मीटर दूर ले जाकर अराई रोड के किनारे कार को खड़ा किया गया और डीजल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया गया. हत्यारों को लगा कि आग में शवों के साथ सारे सबूत भी जलकर राख हो जाएंगे, लेकिन वे फॉरेंसिक साइंस की ताकत को भूल गए.
ईंट, माचिस और फोल्ड सीटें इन सुरागों ने बिगाड़ा हत्यारों का खेल
जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि तफ्तीश के दौरान पुलिस जब सबसे पहले मृतक के घर पर पहुंची, तो वहां की दीवारों और फर्श पर कई जगह खून के हल्के धब्बे मिले. बारीकी से तलाशी लेने पर घर से दो ऐसी ईंटें बरामद हुईं, जिन पर गाढ़ा खून लगा हुआ था. इसके अलावा एक माचिस भी मिली, जिस पर कातिल की उंगलियों से लगे खून के निशान थे. पुलिस को यह भी पता चला कि वारदात के ठीक बाद घर को पानी और केमिकल से धोने की नाकाम कोशिश की गई थी ताकि सबूत मिटाए जा सकें.
वहीं दूसरी तरफ, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और एमओबी (MOB) की टीमों को जली हुई स्कॉर्पियो की स्थिति देखकर बड़ा सुराग हाथ लगा. कार की पिछली सीटें पूरी तरह से फोल्ड अवस्था में थीं. एक्सपर्ट्स का साफ कहना था कि अगर जिंदा इंसान कार में सफर कर रहे होते, तो सीटें कभी फोल्ड नहीं होतीं. यह इस बात का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण था कि चारों को पहले ही मौत की नींद सुलाया जा चुका था और लाशों को ठिकाने लगाने के लिए सामान की तरह कार में लादा गया था.
पहली पत्नी और बच्चे पुलिस कस्टडी में, बड़े खुलासे बाकी
पुलिस कप्तान हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि तमाम तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल टावर लोकेशन और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर जब रामसिंह की पहली पत्नी सुनीता, उसकी बेटी और नाबालिग बेटे को कस्टडी में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार, खून से सने कपड़े और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद करने का दावा किया है.
इस सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाले खुलासे के बाद से पूरे बोराड़ा क्षेत्र में दहशत, सन्नाटा और मातम का माहौल है. ग्रामीण इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि जिस परिवार का इलाके में इतना राजनीतिक और सामाजिक रूतबा था, उसके भीतर रिश्तों की कड़वाहट इस कदर खूनी नरसंहार में बदल जाएगी. फिलहाल बोराड़ा पुलिस इस वीभत्स हत्याकांड की हर बारीक कड़ी को कोर्ट के समक्ष अकाट्य सबूत के रूप में पेश करने के लिए कड़ियां जोड़ रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान इस साजिश में शामिल कुछ और बाहरी मददगारों के नाम भी सामने आ सकते हैं.
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