Rajasthan: एक ही घर से उठीं 5 अर्थियां, 4 साल के आयुष की लाश देख कांपा पूरा गांव; शोक में नहीं जले घरों में चूल्हे

एक ही घर से एक साथ 5 अर्थियों को निकलता देख पाली के भावनगर में आज हर आंख नम है. इन सभी की मौत गुजरात में शनिवार को हुए एक कार एक्सीडेंट में हुई थी. आज पैतृक गांव में इन सभी का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

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राजस्थान के पाली में एक साथ उठीं 5 अर्थियां.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के पाली जिले के भावनगर गांव में आज वो मंजर है जिसे देख पत्थर दिल भी रो पड़े. गुजरात के मेहसाणा के पास 21 फरवरी को हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक ही परिवार के पांचों मृतकों के शव रविवार को जब उनके पैतृक गांव भावनगर पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया. घर के एक ही आंगन में जब एक साथ 5 अर्थियां सजीं, तो सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ सिसक पड़ी. शोक का आलम यह है कि पूरे भावनगर गांव में किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला है.

बहन का मायरा भरकर लौट रहा था परिवार

यह हादसा उस वक्त हुआ जब कुमावत परिवार खुशियां मनाकर लौट रहा था. परिवार के सदस्य पाली के मनिहारी गांव में अपनी एक बहन का मायरा (भात) भरने आए थे. यहां रस्में पूरी करने के बाद, वे अपनी छोटी बहन का मायरा भरने के लिए अहमदाबाद जा रहे थे. लेकिन शनिवार तड़के गुजरात के मेहसाणा (उनावा) के पास उनकी मिनीवैन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई और हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया.

प्रशासनिक अमला पहुंचा सांत्वना देने

इस हादसे में रामलाल कुमावत, कोमल कुमावत, कैलाशभाई कुमावत, 4 साल के मासूम आयुष कुमावत और बुजुर्ग मथुरादेवी कुमावत की मौत हो गई. हृदयविदारक खबर मिलते ही पाली एसडीएम विमलेंद्र राणावत और पुलिस के आला अधिकारी मृतकों के घर भावनगर पहुंचे. अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी.

एक साथ उठा पांचों का जनाजा

ताजा जानकारी के अनुसार, कुछ ही देर पहले ग्रामीण एक साथ पांचों अर्थियां उठाकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हो गए हैं. इस अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए हैं. 4 साल के मासूम आयुष और परिवार के अन्य सदस्यों की एक साथ जलती चिताएं देख हर आंख नम है. NDTV के संवाददाता इस वक्त ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं. उनसे मिली जानकारी जानकारी के अनुसार, एक-एक करके अंतिम संस्कार किया जा रहा है. फिलहाल 2 चिताओं में मुखाग्नि दी जा चुकी है.

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