राजस्थान के पाली जिले में सांपों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने लोगों को हैरान कर दिया. पहले मामले में एक राजकीय विद्यालय की कक्षा में करीब पांच फीट लंबा कोबरा घुस आया, जिससे बच्चों और शिक्षकों में अफरा-तफरी मच गई. वहीं दूसरे मामले में सांप के काटने से घायल मरीज को इलाज के लिए बांगड़ अस्पताल लाया गया तो उसके परिजन पहचान के लिए जिंदा सांप को भी एक डिब्बे में बंद कर साथ ले आए. दोनों घटनाएं जिलेभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं.
चलती क्लास में कोबरा ने मचाया हड़कंप
जानकारी के अनुसार, पाली जिले के एक राजकीय विद्यालय में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही थीं. इसी दौरान अचानक करीब पांच फीट लंबा कोबरा कक्षा में घुस आया. जहरीले सांप को देखते ही बच्चों और शिक्षकों में हड़कंप मच गया. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत कक्षा खाली कराई गई और विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.
घटना की सूचना स्नेक रेस्क्यू टीम को दी गई. टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी सावधानी के साथ कोबरा का रेस्क्यू किया. करीब कुछ मिनट की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया और बाद में उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया. समय रहते रेस्क्यू होने से एक बड़ा हादसा टल गया.
अस्पताल में सांप को लेकर पहुंचे परिजन
दूसरा मामला पाली के बांगड़ अस्पताल का है. यहां सांप के काटने से घायल एक मरीज को उसके परिजन इलाज के लिए लेकर पहुंचे. लेकिन सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई जब परिजन मरीज के साथ उसी सांप को भी एक डिब्बे में बंद कर अस्पताल ले आए. परिजनों का कहना था कि सांप की पहचान होने से डॉक्टरों को इलाज करने में आसानी होगी और यह पता चल सकेगा कि मरीज को किस प्रजाति के सांप ने काटा है. अस्पताल में मरीज के साथ डिब्बे में बंद सांप को देखकर कुछ देर के लिए मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बीच कौतूहल का माहौल बन गया.
स्नेक रेस्क्यू विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश बिल्कुल न करें. ऐसी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें. वहीं यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में समय बर्बाद न करें. मरीज को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं, ताकि समय पर उपचार मिल सके और उसकी जान बचाई जा सके.
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