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This Article is From Feb 23, 2026

20 रुपए के पान मसाला के पैकेट में 4 लाख की केसर कैसे? सलमान खान की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

20 रुपए के पान मसाला के पैकेट में 4 लाख की केसर कैसे? सलमान खान की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Pan Masala ad controversy Salman Khan: जयपुर की जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय में आज एक बार फिर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के जमानती वारंट पर पेश होने की तारीख है. पिछली सुनवाई के दौरान आयोग अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा, सदस्य अजय शर्मा और सुप्रिया अग्रवाल की बेंच ने अभिनेता के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था. वहीं, वारंट की तामील के लिए जयपुर पुलिस कमिश्नर को निर्देश भी दिए गए थे. इससे पहले भी आयोग ने परिवादी योगेंद्र सिंह की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर सलमान को वारंट जारी किए थे, लेकिन तामील न होने पर फिर वारंट जारी हुए. इसके साथ ही बेंच ने सलमान के जमानती वारंट निरस्त करने के प्रार्थना पत्र को भी खारिज कर दिया था. इस याचिका पर 6 फरवरी को बहस पूरी हो चुकी थी.

भ्रामक विज्ञापन से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला भ्रामक विज्ञापन के प्रचार प्रसार से रोक का है. जिला आयोग के समक्ष विज्ञापन के प्रचार पर रोक लगाने के बाद भी कोटा में साइन बोर्ड लगा कर प्रचार करने पर अवमानना की अर्जी पेश की गई है. परिवादी योगेन्द्र सिंह ने पान मसाला एवं सलमान खान के विरुद्ध प्रार्थना पत्र पेश किया था. सलमान खान पर इलायची युक्त पान मसाला बताकर बिक्री बढ़ाने के आरोप लगाए हैं. 

परिवादी ने की 50 लाख रुपए के जुर्माने की मांग 

परिवाद में कहा गया कि बिक्री एवं भ्रामक प्रचार बढ़ाने के लिए आमजन के साथ धोखाधड़ी की गई है. 5 और 20 रुपए के पाउच में 4 लाख रुपए प्रति किलो की केसर मिलाना असम्भव है. परिवाद में भ्रामक प्रचार को रोकने एवं 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाने की मांग की गई है. जिला आयोग के अध्यक्ष जीएल मीणा एवं सदस्यों ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

रोक के बावजूद होर्डिंग्स क्यों? 

वहीं, पिछली सुनवाई के दौरान सलमान और राजश्री पान मसाला के वकीलों ने दावा किया कि उन्होंने आयोग की अवमानना नहीं की. उनका कहना था कि अदालत ने जवाब पेश न होने तक प्रचार रोकने का आदेश दिया था, लेकिन 15 जनवरी को ही जवाब दाखिल कर दिया गया. साथ ही, विज्ञापन पान मसाले का नहीं, बल्कि सिल्वर कोटेड इलायची का था.

इस पर परिवादी के वकील इंद्र मोहन सिंह हनी ने पलटवार किया कि 6 जनवरी को आयोग ने भ्रामक विज्ञापन पर अस्थाई रोक लगाई थी. इसके बावजूद 9 जनवरी को जयपुर, कोटा समेत शहरों में बड़े होर्डिंग्स लगाए गए, जो स्पष्ट अवमानना है.

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