Gyarasi Lal Meena Suspended: राजस्थान सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जयपुर द्वितीय के अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा की सभी न्यायिक शक्तियां तत्काल प्रभाव से वापस ले ली हैं. उपभोक्ता मामले विभाग के जरिए जारी अधिकारिक आदेश के अनुसार ग्यारसीलाल मीणा अगले आदेश तक किसी भी मामले की सुनवाई और निर्णय नहीं कर सकेंगे. सलमान खान को भी पान मसाला मामले में जमानती वारंट तलब किया था.
ग्यारसीलाल मीणा की निलंबित की गई प्रशासनिक शक्तियां
उपभोक्ता मामले विभाग के जरिए जारी आदेश में कहा गया है कि उनके खिलाफ लंबित जांच के चलते उन्हें न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक कार्यों से अलग किया गया है. साथ ही, उनकी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां भी निलंबित कर दी गई हैं.
सलमान खान से लेकर मैकडॉनल्ड्स एमडी तक को जारी कर चुके वारंट
अध्यक्ष ग्यारसीलाल मीणा का कार्यकाल अपने विवादित फैसलों के कारण काफी चर्चा में रहा हैं. उन्होंने पान मसाला विज्ञापन मामले में बॉलिवुड के अभिनेता सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था. इसके अलावा, खाद्य गुणवत्ता से जुड़े एक मामले में मैकडॉनल्ड्स के एमडी राजीव रंजन तथा ब्रांड एंबेसडर रहे रणवीर सिंह और कार्तिक आर्यन को भी नोटिस जारी किए थे.
केवल सेलिब्रिटी ही नहीं, बल्कि अलवर के सिलीसेढ़ बांध और सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित एक रिसॉर्ट की सील खुलवाने का उनका फैसला काफी विवादो में रहा था. इस मामले में उन्होंने यूआईटी की कार्रवाई को अवैध बताते हुए स्वयं मौके पर जाकर सील खुलवाई थी.
विभाग के जरिए जारी किया गया नोटिस
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16.50 लाख रुपये की अवैध वसूली के गंभीर आरोप
लंबे समय से मिल रही उनके खिलाफ कदाचार और न्यायिक अवैध वसूली की शिकायतों के बाद उनपर कार्रवाई की गई है. सरकारी आदेश के अनुसार, मीणा के खिलाफ गंभीर कदाचार, आपराधिक धोखाधड़ी, अपने पद का दुरुपयोग और न्यायपालिका के नाम पर 16.50 लाख रुपये की अवैध वसूली के आरोपों की लिखित शिकायत के रूप में संगीन आरोप लगे हैं.
सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इतने गंभीर आरोपों की जांच लंबित रहने के दौरान किसी भी अधिकारी को न्यायिक पद पर बनाए रखना प्राकृतिक न्याय और सुशासन के सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है.
पुराना है विवादों और बर्खास्ती का नाता
गौरतलब है कि ग्यारसीलाल मीणा को पहले भी 3 जून 2025 को प्रशासनिक कदाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में बर्खास्त किया गया था, हालांकि 26 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट से उन्हें स्थगन आदेश मिल गया था, जिसके बाद वे दोबारा पद पर बहाल हो गए थे.
वहीं, इससे पहले उनकी नियुक्ति भी विवादों में रही थी. 13 मार्च 2023 को गहलोत सरकार के दौरान हुई नियुक्ति का कांग्रेस लीगल सेल से जुड़े वकीलों ने विरोध किया था. उस समय वे भाजपा एसटी मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और पार्टी की लीगल सेल से जुड़े हुए थे, जिस पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप भी लगे थे.
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