Jaisalmer News: सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पोकरण-रामदेवरा मार्ग पर मृत गायों के शवों का पहाड़ दिखाई दे रहा था, जिसे आवारा कुत्ते नोच रहे थे. इस विचलित करने वाली तस्वीर के सामने आने के बाद जब NDTV की टीम ठीक 24 घंटे बाद ग्राउंड जीरो पर सच जानने पहुंची, तो वहां का नजारा देख सब चौंक गए. जहां वीडियो में लाशों का ढेर था, वह ग्राउंड अब एक दम साफ हो चुका था. आखिर रातों-रात वे सैंकड़ों मृत गायें कहां चली गईं? क्या यह प्रशासन की सोची-समझी सफाई थी या इसके पीछे कोई बड़ा राज छिपा है?
वायरल वीडियो का खौफनाक सच
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 28 मई की शाम करीब 6:30 बजे रामदेवरा निवासी गौभक्त प्रदीप सैन ने इस जगह का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. वीडियो में दावा किया गया कि पोकरण-रामदेवरा मार्ग के पास स्थित ओरण भूमि पर 250 से 300 गायों के शव खुले में लावारिस पड़े हैं. चारा-पानी और इलाज की कमी से तड़पकर मरी इन गायों को आवारा जानवर अपना निवाला बना रहे थे. यह वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुआ, पूरे राजस्थान के गौभक्तों में आक्रोश फैल गया.
गायब मिले शव, हवा में तैरती दुर्गंध
वीडियो की हकीकत जानने के लिए जब NDTV की टीम मौके पर पहुंची, तो कहानी पूरी तरह बदल चुकी थी. हैरान करने वाली बात यह थी कि वीडियो में दिख रहे ताजा शव वहां से गायब थे. पूरा ग्राउंड साफ किया जा चुका था. हालांकि, साक्ष्य पूरी तरह नहीं मिटाए जा सके थे. वहां भारी मात्रा में पशुओं के पुराने अवशेष, हड्डियां बिखरी हुई थीं और पूरे इलाके में इतनी भयानक दुर्गंध थी कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी दूभर था.
'जेसीबी लगाकर दबाया गया सच'
प्रशासन की इस रहस्यमयी 'सफाई' पर स्थानीय गौभक्तों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. वीडियो बनाने वाले प्रदीप सैन और समाजसेवी हाकम दान काआरोप है कि प्रशासन ने अपनी नाकामी और पोल खुलने के डर से यह कदम उठाया. गौभक्तों का कहना है, 'प्रशासन को डर था कि अगर इतनी बड़ी संख्या में गौवंश की मौत की खबर बाहर गई, तो बवाल हो जाएगा. इसलिए अधिकारियों के आने से ठीक पहले जेसीबी मशीनें लगाकर रातों-रात सैंकड़ों शवों को मिट्टी में दफना दिया गया और सबूत मिटाने की कोशिश की गई.'
हाकम दान ने पशुपालन मंत्री से इस पूरे मामला दबाने की साजिश की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि 10 जून तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे.
गौ-भक्त प्रदीप सेन और हाकम दान के साथ समाजसेवी महेश पुरोहित की तस्वीर.
Photo Credit: NDTV Reporter
'सबूत मिटाया नहीं, यह तो डंपिंग यार्ड है'
दूसरी तरफ, पोकरण उपखंड अधिकारी हीर सिंह चारण ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने NDTV से बातचीत में दावा किया कि सोशल मीडिया पर चल रहा वीडियो पूरी तरह भ्रामक है. SDM हीर सिंह चारण ने साफ किया कि, 'जिस जगह का वीडियो दिखाया जा रहा है, वह कोई गौशाला नहीं है, बल्कि ओरण भूमि है. आसपास के 10 से 15 किलोमीटर के दायरे से लोग अपने मृत पशुओं को लाकर इसी निर्धारित डंपिंग यार्ड में डालते हैं. हमने पास की गौशाला का भी निरीक्षण किया है, जहां चारा, पानी और चिकित्सा की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह संतोषजनक मिली हैं. सनसनी फैलाने के लिए वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया.'
भले ही प्रशासन इसे रूटीन डंपिंग यार्ड बताकर पल्ला झाड़ रहा हो, लेकिन स्थानीय लोगों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है. सवाल यह है कि अगर यह रूटीन प्रक्रिया थी, तो वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद ही उस जगह को इतनी हड़बड़ी में साफ क्यों किया गया? क्या सच में गायों की मौत किसी बीमारी या चारे-पानी की कमी से हुई थी जिसे दफना दिया गया? अब यह मामला पूरी तरह से एक सियासी और प्रशासनिक रहस्य बन चुका है, जिसका सच निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा.
टीकाराम जूली ने भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक लंबा पोस्ट लिखकर भजनलाल सरकार की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'गौमाता के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार के राज में आज राजस्थान में गौवंश की दुर्दशा अपने चरम पर पहुंच चुकी है. कहीं प्यास से व्याकुल गौमाताएं दलदल में फंसकर दम तोड़ रही हैं, तो कहीं उनके शव खुले डंपिंग यार्डों में सड़ रहे हैं. भाजपा ने वर्षों तक गौमाता के नाम पर वोट मांगे, भावनाएं भड़काईं, लेकिन आज हकीकत यह है कि प्रदेशभर में गौवंश भूख, प्यास, बीमारी और सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रहा है.'
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