Rajasthan: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के 6 घंटे बाद आरोपी हो गए थे गिरफ्तार, 11 महीने में कोर्ट ने सुनाया फैसला

Tribal women viral video: घटना के दौरान 21 साल की वह आदिवासी महिला चार महीने की गर्भवती थी और वह अपने पति से अपनी इज्जत की गुहार लगा रही थी लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी.आस-पास खड़े लोग उसका वीडियो बना रहे थे.

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Pratapgarh SP Amit kumar

Pratapgarh viral video: देशभर में कई सरकारें बदलीं, कई नेता बदले लेकिन एक चीज जो नहीं बदली वो थी महिलाओं की स्थिति. भले ही हर जगह महिला सुरक्षा की बात हो रही हो लेकिन उसके बावजूद देशभर में कई ऐसी घटनाएं घटीं जिसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया. राजस्थान में भी 1 सितंबर 2023 में एक आदिवासी महिला को निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घूमने का  मामला काफी गरमाया था.

प्रदेश के प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी इलाके में इस तरह की घटना होना अपने आप में एक संवेदनशील मामला था. इस तरह के मामलों में जगह और पीड़िता की पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है,क्योंकि यह घटना उस समय आग की तरह फैल रही थी. उस दौरान पुलिस के पास सिर्फ एक ही चीज थी वह था महिला का वीडियो ऐसे में उस महिला और आरोपियों की पहचान करना ही सबसे पहला काम था. इस घटना में उसका पति और ससुर दोनों शामिल थे.घटना के दौरान 21 साल की वह आदिवासी महिला चार महीने की गर्भवती थी और  वह अपने पति से अपनी इज्जत की गुहार लगा रही थी लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी.आस-पास खड़े लोग उसका वीडियो बना रहे थे. इसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और इसकी जानकारी पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गई. जिसके बाद पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया. 

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 एक एक्शन से बदली तस्वीर

ऐसे में इस केस की कमान तत्कालीन प्रतापगढ़ एसपी अमित कुमार को सौंपी गई. इस घटना की जानकारी मिलते ही वह हरकत में आए और सबसे पहले जिले के सभी पुलिसकर्मियों को दरियाबाद थाने पहुंचने को कहा. उस समय थाने पर डेढ़ सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी मौजूद थे. एसपी कुमार ने सभी पुलिसकर्मियों को वह वीडियो दिखाया, जिसमें आरोपियों की पहचान की गई थी. इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश की कार्रवाई शुरू की.उधर,पुलिस मुख्यालय से मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजी एमएन दिनेश को प्रतापगढ़ भेजा गया.

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11 महीने बाद कोर्टसे मिला न्याय

एडीजी एमएन दिनेश के निर्देश पर 30 टीमें गठित कर उस क्षेत्र के सभी पुलिस कर्मियों को वीडियो दिखाकर पीड़ित महिला और आरोपियों की पहचान कराई गई. इसके बाद पुलिस ने गांव में दबिश दी. पुलिस के डर से आरोपी जंगल में भाग गए. ऐसे में पुलिस के लिए उन्हें ढूंढना मुश्किल हो गया.सभी आरोपी आदिवासी थे और जंगल को अच्छी तरह समझते थे.ऐसे में पुलिस भी उन्हें ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़ी. ऐसे में पुलिस के पास न तो सूचना देने के लिए नेटवर्क था और न ही उन्हें जंगल से बाहर निकलने का रास्ता पता था.फिर भी इस दौरान एसपी अमित कुमार ने जंगल से बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर विशेष पुलिस टीमें तैनात कर दीं और खुद भी आरोपियों की तलाश में जंगल में उतर गए। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने करीब 6 घंटे बाद आरोपियों को जंगल से पकड़ लिया.हालांकि इन 6 घंटों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर कई बड़े सवाल उठे थे.
अब करीब 11 महीने बाद कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है.जिसमें कोर्ट ने पीड़िता के पति समेत 17 लोगों को दोषी माना है.जिसमें से 14 को 7-7 साल की सजा सुनाई गई है.मामले में शामिल तीन महिलाओं को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है.

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