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This Article is From Feb 26, 2026

बांसवाड़ा में दिखा निजी बस हड़ताल का असर, रोडवेज बसों में ठसाठस भीड़; 280 से ज्यादा बसों के पहिये थमे

राजस्थान में बसों की हड़ताल का असर बांसवाड़ा में साफ दिखा जहां निजी बसों के पहिये थमते ही यात्री परेशान हो गए. रोडवेज बसों में भारी भीड़ उमड़ी और कई लोगों को घंटों इंतजार व खड़े होकर सफर करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है.

बांसवाड़ा में दिखा निजी बस हड़ताल का असर, रोडवेज बसों में ठसाठस भीड़; 280 से ज्यादा बसों के पहिये थमे
राजस्थान में बसों की हड़ताल का असर अब साफ दिखने लगा है.

Rajasthan News: राजस्थान में निजी बस संचालकों के आह्वान पर की गई हड़ताल का व्यापक असर बांसवाड़ा जिले में देखने को मिला. जिले में करीब 280 से 300 निजी बसों के संचालन पर पूरी तरह रोक लग गई. इससे परिवहन व्यवस्था लगभग ठप हो गई और हजारों यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी.

ग्रामीण यात्रियों को लगी सबसे ज्यादा मार

दूर-दराज गांवों से शहर पहुंचे कई यात्रियों को हड़ताल की पहले से कोई जानकारी नहीं थी. बस स्टैंड पहुंचने पर जब उन्हें बसें बंद होने की बात पता चली तो कई लोग मायूस होकर वापस गांव लौट गए. वहीं लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को वैकल्पिक साधन ढूंढने पड़े जिससे समय और पैसे दोनों की हानि हुई.

रोडवेज बसों पर बढ़ा दबाव

निजी बसों के बंद होने का सीधा असर रोडवेज सेवाओं पर पड़ा. सीमित संख्या में चल रही रोडवेज बसों में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. बसों में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठीं. बुजुर्ग महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों को खड़े होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ी. कई यात्रियों को घंटों तक बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा.

रातभर फंसे रहे यात्री

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर लंबी दूरी के यात्रियों पर पड़ा. शाम 5 बजे से बस का इंतजार कर रहे बाजना से दूदू जाने वाले करीब 18 यात्रियों को देर रात 11:30 बजे बस मिलने का आश्वासन दिया गया. कई लोग अपने सामान और बच्चों के साथ रातभर बस स्टैंड पर डटे रहे. पूर्व सूचना के अभाव में लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली.

हड़ताल की वजह क्या है

निजी बस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुजफ्फर अली ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा बार-बार बसों के चालान बनाए जा रहे हैं और वाहनों को सीज किया जा रहा है. उनका कहना है कि लंबे समय से सरकार से समस्याओं के समाधान की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि बांसवाड़ा जैसे जिले में रेल और हवाई सेवा नहीं होने से आमजन पूरी तरह बस परिवहन पर निर्भर हैं. ऐसे में हड़ताल से यात्रियों और संचालकों दोनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है.

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