राजस्थान के पुष्कर में कांग्रेस के चिंतन शिविर से कई अहम मायने निकाले जा रहे हैं. राहुल गांधी के दौरे के बाद साफ हो गया है कि कांग्रेस अब किसी एक बड़े नेता के भरोसे नहीं रहेगी. बल्कि पार्टी का जोर सामूहिक नेतृत्व और मजबूत संगठन के सहारे चुनावी मैदान में उतरेगी. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने चिंतन शिविर के दौरान जिलाध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठकों में चर्चा की. उनका संदेश था कि राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता में वापसी तभी संभव है, जब सभी नेता-कार्यकर्ता मिलकर काम करेंगे. केवल एक-दो बड़े नेताओं के भरोसे चुनाव जीतना अब जीत पाना संभव नहीं है. पार्टी को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना होगा और हर नेता को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.
गहलोत-पायलट की बहस अब इतिहास!
दरअसल, राजस्थान कांग्रेस की राजनीति पिछले एक दशक से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के इर्द-गिर्द घूम रही है. साल 2018 में सरकार बनी तब भी दोनों की चर्चा हुई. जब सरकार पर संकट आया तो पायलट गुट की बगावत और मानेसर एपिसोड ने भी परेशानी खड़ी कर दी थी. राहुल गांधी ने पहली बार इस पूरी बहस को पीछे छोड़ने की कोशिश की है. सूत्रों के मुताबिक, चिंतन शिविर में सबसे ज्यादा चर्चा संगठन की मजबूती, जिलाध्यक्षों की भूमिका और बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करने की रही. उन्होंने ने जिलाध्यक्षों के साथ अलग से संवाद किया और संगठन की जमीनी स्थिति पर फीडबैक लिया.
राजनीतिक जानकार इसे सामान्य प्रक्रिया नहीं मान रहे. उनका मानना है कि कांग्रेस अब चुनावी राजनीति में संगठन को केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है. इस बार पूरा राहुल गांधी ने न तो किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाने का संकेत दिया और न ही मुख्यमंत्री पद या नेतृत्व को लेकर कोई चर्चा होने दी. इसके बजाय उनका पूरा जोर संगठन की मजबूती और सामूहिक नेतृत्व पर रहा.
डोटासरा और जूली के बहाने भी मैसेज
राहुल गांधी ने कदम-कदम पर राजनीतिक संकेत दिए. किशनगढ़ एयरपोर्ट पर गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली की तारीफ के बहाने दूसरे राज्यों को भी संदेश दिया. मैसेज साफ था कि गुटबाजी से दूर रहकर संगठन को मजबूत करने का काम करना होगा. डोटासरा और जूली की सार्वजनिक तौर पर सराहना इसी का हिस्सा माना जा रहा है. राजनीतिक तौर पर दोनों नेताओं पर केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है.
जूली और डोटासरा की जोड़ी काफी चर्चा में रही.
प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अटकल खत्म!
यह पूरा एपिसोड डोटासरा के लिए अहम रहने वाला है. क्योंकि पिछले कुछ समय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बदलाव को लेकर अटकल चल रही थी. सोमवार (2 जून) की राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि अब संगठन की कमान डोटासरा के हाथों में ही रहेगी. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी इस शिविर के बाद राजनीतिक रूप से मजबूत होकर उभरे हैं. राहुल गांधी ने विधानसभा के भीतर भाजपा सरकार के खिलाफ उनकी भूमिका और सक्रियता की सराहना की. इससे साफ है कि जूली सिर्फ सदन में कांग्रेस के नेता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे हैं.
गहलोत गैरमौजूद, पायलट एक्टिव मोड में
शिविर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही . राहुल गांधी का किशनगढ़ एयरपोर्ट पर स्वागत करने के बाद गहलोत जयपुर लौट गए थे. इसकी वजह स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को बताया जा रहा है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट काफी तेज है. दूसरी ओर, सचिन पायलट चिंतन शिविर में सक्रिय नजर आए. राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभा रहे पायलट से राहुल गांधी ने राजस्थान कांग्रेस के भविष्य और पार्टी की रणनीति को लेकर सुझाव लिए. उन्होंने युवाओं, रोजगार, किसानों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया. राहुल गांधी की राजनीति भी लंबे समय से इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रही है.
राहुल गांधी ने कांग्रेस के नेताओं से सुझाव लिए.
डॉ. सीपी जोशी से राहुल गांधी ने पूछा सवाल
इन सबके बीच, एक चेहरा और भी केंद्र में रहा. पार्टी की कमान संभाल चुके और विधानसभा स्पीकर रहे डॉ. सीपी जोशी को भी काफी अहमियत दी गई. राहुल गांधी ने जब पूछा कि कांग्रेस को आगे क्या करना चाहिए तो जोशी ने युवा नेतृत्व को आगे लाने की बात कही. इसे कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की अगली पीढ़ी को लेकर चल रही बहस के रूप में भी देखा जा रहा है. कांग्रेस कार्यसमिति के पूर्व सदस्य रघुवीर मीणा ने आदिवासी क्षेत्रों में कमजोर होते जनाधार का मुद्दा उठाकर दक्षिण राजस्थान पर फोकस बढ़ाने की जरूरत बताई. राहुल गांधी ने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई वरिष्ठ नेताओं से भी फीडबैक लिया.
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