लेटलतीफ कार्मिकों पर प्रशासनिक सुधार विभाग का एक्शन, कलेक्टर-ADM भी समय नहीं पहुंचे; PWD ऑफिस में लटका ताला

जिला कलेक्ट्रेट में 40 में से 33 कार्मिक अनुपस्थित पाए गए. जिला कलेक्टर महेंद्र खड़गावत व एडीएम मोहनलाल खटवानालिया भी निरीक्षण तक समय पर कलेक्ट्रेट नहीं पहुंचे.

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Rajasthan News: सरकारी दफ्तरों में आए दिन सरकारी कर्मचारियों के देरी से दफ्तर आने की शिकायतें आती रहती हैं. इसके बावजूद उनके रवैये में कोई सुधार नजर नहीं आता. इसी बीच मंगलवार डीडवाना में राजस्थान सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग की कार्रवाई से लेटलतीफ कार्मिकों पर गाज गिरी है. प्रशासनिक सुधार विभाग की एक राज्य स्तरीय टीम ने सुबह ठीक 9:40 बजे एक साथ 14 सरकारी विभागों पर धावा बोला. इस दौरान टीम ने 14 विभागीय कार्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें 60% कर्मचारी अधिकारी अनुपस्थित पाए गए.

कलेक्ट्रेट में 44 में से 33 कार्मिक अनुपस्थित

जिला परिवहन कार्यालय में 10 में से 9 कर्मचारी अनुपस्थित मिले. वहीं जिला कलेक्ट्रेट में 40 में से 33 कार्मिक अनुपस्थित पाए गए. जिला कलेक्टर महेंद्र खड़गावत व एडीएम मोहनलाल खटवानालिया भी निरीक्षण तक समय पर कलेक्ट्रेट नहीं पहुंचे. ADM मोहनलाल खटवानलिया बीते तीन दिनों से अनुपस्थित पाए गए, जबकि सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यालय की स्थिति और भी बदतर थी. वहां मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ पाया गया. इस कार्रवाई में प्रशासनिक सुधार विभाग की टीम ने कुल 35 हाजिरी रजिस्टरों की गहनता से जांच की.

कुल 307 कर्मचारियों में से 184 कर्मचारी गायब

इस पूरी कार्रवाई में पाया गया कि जिले के लगभग 60 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी से नदारद हैं. शहर के 14 विभागों में कुल 77 राजपत्रित अधिकारियों में से 47 अधिकारी कार्यालय में नहीं थे. इसी प्रकार 307 अराजपत्रित कर्मचारियों में से 184 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए. सुबह-सुबह हुई इस बड़ी छापेमारी से पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और कई विभागों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया. इस औचक निरीक्षण ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जहां पोल खोलकर रख दी है, जहां आम जनता के काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियो की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं.  

इस दौरान शासन उप सचिव सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि जिले के सभी विभागों में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जो चिंताजनक है. अधिकारियों व कर्मचारियों की लेटलतीफी ना केवल गंभीर है. बल्कि पदीय दायित्वों के भी खिलाफ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के कार्यों में लापरवाही और सरकारी अनुशासन की धज्जियां उड़ाने वाले किसी भी कार्मिक को बख्शा नहीं जाएगा. अनुपस्थित मिले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जयपुर मुख्यालय को भेज दी गई है, जिसके आधार पर अब इन सभी के खिलाफ नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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