Rajasthan Local Body Election: राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया गया. इस संशोधन के जरिए राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 2 और धारा 24 में बदलाव किया गया है. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब नगरीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक बच्चों की बाध्यता खत्म कर दी गई है. पहले यदि किसी व्यक्ति के दो से अधिक संतान होती थीं तो वह नगरपालिका का सदस्य बनने के लिए अयोग्य माना जाता था.
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के कथन में सरकार ने कहा कि अधिनियम की धारा 24 में नगरपालिका सदस्यों के लिए सामान्य निरर्हताओं का प्रावधान है. इसमें यह व्यवस्था थी कि दो से अधिक संतान होने पर कोई भी व्यक्ति नगरपालिका का सदस्य चुने जाने या बनने के लिए अयोग्य होगा. अब इस प्रावधान को हटाने का निर्णय लिया गया है.
अधिक संतान होने के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे
सरकार का कहना है कि समाज में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अब व्यापक जागरूकता आ चुकी है. ऐसे में कई ऐसे लोग जो समाज सेवा और जनता का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखते हैं वे केवल दो से अधिक संतान होने के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे. इसी कारण राज्य सरकार ने इस निरर्हता को हटाने का निर्णय लिया है. विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संतानों की संख्या की गणना करते समय कुछ विशेष परिस्थितियों को अलग रखा जाएगा. एक ही प्रसव से जन्मे बच्चों की संख्या को एक ही माना जाएगा.
वहीं पूर्व प्रसव से जन्मे ऐसे दिव्यांग बच्चों को संतानों की कुल संख्या में शामिल नहीं किया जाएगा जो दिव्यांगता से ग्रस्त हों. संशोधन में यह भी कहा गया है कि दिव्यांगता की परिभाषा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुसार मानी जाएगी. यानी उसी अधिनियम में वर्णित किसी भी प्रकार की दिव्यांगता इस प्रावधान के अंतर्गत शामिल होगी.
कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैए की भी बात
विधेयक में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक रिट याचिका पर 7 मई 2025 को आदेश देते हुए सभी राज्य सरकारों को ऐसे कानूनों और प्रावधानों की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे जिनमें कुष्ठ रोग से प्रभावित या उपचारित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण या अपमानजनक प्रावधान शामिल हैं. इसके बाद गठित समिति ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 में ‘खतरनाक रोग' की परिभाषा में शामिल कुष्ठ रोग के संदर्भ को हटाने की भी सिफारिश की. सरकार ने समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा. इसके तहत धारा 2 में ‘खतरनाक रोग' की परिभाषा में शामिल कुष्ठ रोग के उल्लेख को हटाने का भी प्रावधान किया गया है.
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य कानून को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाना और भेदभावपूर्ण प्रावधानों को समाप्त करना है. विधानसभा में चर्चा के बाद राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया गया. इसके साथ ही अब अधिनियम की संबंधित धाराओं में प्रस्तावित बदलाव लागू हो जाएंगे.
यह भी पढ़ें- 8500 लोगों से 2 करोड़ की ठगी... बिहार में बैठा था मास्टरमाइंड, राजस्थान पुलिस ने किया गिरफ्तार