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This Article is From Feb 22, 2026

Rajasthan: भरतपुर के तरबीजपुर गांव में सड़कों की बदहाली, 'कोई इस गांव में अपनी बेटी नहीं ब्याहता'  

ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी समस्या को लेकर कई बार सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला.

Rajasthan: भरतपुर के तरबीजपुर गांव में सड़कों की बदहाली, 'कोई इस गांव में अपनी बेटी नहीं ब्याहता'  

Bharatpur News: भारत ने अपनी आज़ादी के 78 वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस दौरान देश ने कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास किया है, दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का निर्माण हो या चांद तक पहुंचने की उपलब्धि. लेकिन इन उपलब्धियों के बीच आज भी कुछ ऐसे गांव हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है.

भरतपुर जिले के बयाना उपखंड अंतर्गत आने वाला तरबीजपुर गांव इसी विडंबना की मिसाल है. ग्रामीणों के अनुसार आज़ादी के बाद गांव में केवल एक बार सड़क का निर्माण हुआ था, लेकिन उसके बाद से टूटी हुई सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं किया गया. खराब सड़क के कारण ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति का असर अब सामाजिक जीवन पर भी पड़ने लगा है. गांव के युवाओं की शादियां नहीं हो पा रही हैं, क्योंकि लड़कियों के परिवार खराब रास्ते के कारण रिश्ता करने से हिचकिचाते हैं. वहीं एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिसके चलते मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है और कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण रास्ते में ही प्रसव हो जाता है. बारिश के मौसम में सड़क पर पानी भर जाने से आवागमन लगभग ठप हो जाता है.

100 से अधिक युवकों की शादी पर संकट मंडरा रहा है

ग्रामीण बहादुर सिंह ने बताया कि करीब 20 वर्षों से टूटी सड़क का निर्माण नहीं हुआ है और सड़क के नाम पर केवल गड्ढे और धूल ही बची है. खराब सड़क के कारण 100 से अधिक युवकों की शादी पर संकट मंडरा रहा है. रिश्ते आने के बावजूद लड़की पक्ष सड़क की स्थिति देखकर मना कर देता है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई बार बीमार लोगों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और रास्ते में ही लोगों की जान चली गई.

गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन

ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी समस्या को लेकर कई बार सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. यही कारण है कि एक दर्जन से अधिक परिवार गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं और उनके घरों पर ताले लगे हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक लोगों का गांव लौटना मुश्किल है.

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