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Rajasthan: आजादी के 78 साल बाद भी 3 हजार की आबादी वाले गांव में नेटवर्क नहीं, आपातकाल में भी नहीं मिलती मदद

राजस्थान में भरतपुर के वैर उपखंड का हथौड़ी गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट से वंचित है. ग्रामीणों को फोन करने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. आपातकालीन सेवाएं, पढ़ाई और बैंकिंग काम भी इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.

Rajasthan: आजादी के 78 साल बाद भी 3 हजार की आबादी वाले गांव में नेटवर्क नहीं, आपातकाल में भी नहीं मिलती मदद
राजस्थान में भरतपुर के वैर उपखंड का हथौड़ी गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट से वंचित है.

Rajasthan News: देश आज डिजिटल इंडिया और 5जी नेटवर्क की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन राजस्थान के भरतपुर जिले का एक गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है. वैर उपखंड का हथौड़ी गांव आज भी संचार व्यवस्था की कमी से जूझ रहा है, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है.

मोबाइल से बात करने के लिए पहाड़ पर जाना पड़ता है

हथौड़ी गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण लोगों को फोन पर बात करने के लिए गांव से दूर जाना पड़ता है. कई बार ग्रामीण पहाड़ पर बने हनुमान मंदिर की ऊंची चोटी पर चढ़कर किसी तरह सिग्नल पकड़ते हैं. वहीं कुछ लोगों को फोन करने के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर वैर कस्बे तक जाना पड़ता है.

आपातकालीन सेवाओं में भी हो रही बड़ी परेशानी

नेटवर्क की कमी का सबसे ज्यादा असर आपातकालीन स्थितियों में देखने को मिलता है. गांव के लोगों का कहना है कि अचानक किसी की तबीयत खराब हो जाए या दुर्घटना हो जाए तो एंबुलेंस या मदद के लिए फोन तक नहीं कर पाते. कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से लोगों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ता है.

मंदिर के महंत बनते हैं गांव के संचार का सहारा

गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण लोग एक अनोखा तरीका अपनाते हैं. पहाड़ पर स्थित हनुमान मंदिर के महंत रामसेवक दास उर्फ टुंडा बाबा के पास मोबाइल सिग्नल आता है. ग्रामीण किसी जरूरी काम के लिए उनके नंबर पर फोन करवाते हैं. इसके बाद महंत माइक से गांव में आवाज देकर संबंधित व्यक्ति को सूचना देते हैं. जरूरत होने पर लोग मंदिर पहुंचकर वहीं से बात करते हैं.

तीन हजार की आबादी, फिर भी नहीं लगा मोबाइल टॉवर

ग्रामीण पूर्व जिला परिषद सदस्य ईश्वर सिंह फौजदार के अनुसार गांव की आबादी करीब तीन हजार है लेकिन कई किलोमीटर तक मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता. किसी अप्रिय घटना की सूचना देने के लिए भी लोगों को 8 किलोमीटर दूर वैर जाना पड़ता है. ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित शिकायत भी दी है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ.

जमीन देने को तैयार किसान, फिर भी नहीं बन रहा टॉवर

गांव के पूर्व सरपंच कुबेर सिंह का कहना है कि मोबाइल कंपनियां टॉवर लगाने के लिए तैयार नहीं हो रही हैं. उन्हें लगता है कि यह जमीन वन विभाग की है और एनओसी लेने में परेशानी आती है. जबकि गांव के किसान अपनी निजी जमीन टॉवर लगाने के लिए देने को तैयार हैं.

पढ़ाई और सरकारी काम भी हो रहे प्रभावित

गांव के लोगों के अनुसार नेटवर्क नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. शिक्षक भी स्कूल से जुड़े ऑनलाइन काम करने के लिए गांव से बाहर जाते हैं. बैंकिंग और राशन से जुड़ी सेवाओं में भी ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती है. ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में मोबाइल टॉवर लगाकर नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए.

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