राजस्थान के जैसलमेर जिले में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता के हक में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने फेमस ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा (Toyota) और उसकी डीलरशिप को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित ग्राहक को पुरानी कार के बदले बिल्कुल नई 'इनोवा हाईक्रॉस ZX(O) हाइब्रिड' कार सौंपने का आदेश दिया है. इसके साथ ही आयोग ने सेवा में कमी और गुमराह करने के आरोप में कंपनी पर लाखों रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी ठोंका है.
टॉप मॉडल की जगह थमा दिया कम फीचर्स वाला वेरिएंट
परिवादी सुरेश कुमार बिस्सा ने 20 जुलाई 2023 को जैसलमेर स्थित मयंक टोयोटा शोरूम में 50 हजार रुपए जमा करवाकर इनोवा हाईक्रॉस ZX(O) हाइब्रिड मॉडल की बुकिंग करवाई थी. इसके बाद 16 मार्च 2024 को जोधपुर शोरूम से वाहन की डिलीवरी दी गई. परिवार का आरोप है कि डिलीवरी के समय उन्हें बताया गया कि गाड़ी बुक किए गए मॉडल के जैसी है, लेकिन इस्तेमाल करने पर पता चला कि उन्हें ZX(O) की बजाय ZX वेरिएंट दिया गया है, जिसमें कई जरूरी फीचर्स, विशेष रूप से ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) उपलब्ध नहीं था.
कार की सर्विस कराने गए तो उड़े होश
दरअसल, 10 मार्च 2025 को मुंबई में कार की सर्विस कराने गए तो उनके होश उड़ गए. वहां उन्होंने गाड़ी में ADAS सिस्टम एक्टिव करने के लिए कहा, जिसपर सर्विसिंग सेंटर ने उन्हें बताया कि यह सुविधा केवल ZX(O) मॉडल में है उनके पास ZX वेरिएंट है.
इसके बाद परिवार ने कई बार कंपनी और शोरूम से कार बदलने का अनुरोध किया, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर 21 नवंबर 2025 को कार के मालिक ने जिला उपभोक्ता आयोग, जैसलमेर में शिकायत पेश की. 13 मार्च 2026 को निधन हो गया,जिसके बाद उनकी लड़ाई उनके बेटे दीपक बिस्सा ने जारी रखी जो शेयर मार्केट के व्यवसाय से जुड़े हैं.
नई कार के साथ अदालत ने लगाया तगड़ा जुर्माना
आयोग के चेयरमैन पवन कुमार ओझा की अगुवाई वाली बेंच ने 11 जून को फैसला सुनाते हुए टोयोटा डीलरशिप को कंज्यूमर की मौजूदा कार वापस लेकर उसे नई 'इनोवा हाईक्रॉस ZX(O) हाइब्रिड' कार देने का आदेश दिया है. कंपनी कार की डिलीवरी का सारा ऑन-रोड खर्च भी उठाएगी. इसके अलावा, कमीशन ने ये पेनल्टी भी लगाई हैं. कोर्ट ने कंज्यूमर को मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए 3 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है. साथ ही, डीलरशिप पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और गलत डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए (यह रकम स्टेट कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जाएगी). गलत एफिडेविट देने के लिए ऑथराइज्ड सिग्नेटरी रिचपाल सिंह पर 50,000 रुपये का पर्सनल पेनल्टी लगाया है. लिटिगेशन खर्च (कानूनी खर्च) के तौर पर 10,000 रुपये.
उपभोक्ता के पक्ष में सुनाया फैसला
परिवादी पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता प्रथमेश आचार्य ने बताया कि मामला नवंबर 2025 में उनके कार्यालय पहुंचा था, जिसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता मयंक व्यास ने इसकी पैरवी की. कंपनी को कई बार गलती सुधारने का अवसर दिया गया, लेकिन समाधान नहीं निकाला गया. ऐसे में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की गई. उन्होंने कहा कि आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, तकनीकी तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया.
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