राजस्थान में डॉग बाइट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) के तहत संकलित जिला-वार आंकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 से 2025-26 तक राज्य में 18,42,617 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में मामलों में 5 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान में पिछले तीन सालों के दौरान औसतन हर साल 4 लाख से ज्यादा लोग डॉग बाईट के मामले आ रहे हैं.
राजस्थान में वर्ष 2021-22 में 88,259 मामले दर्ज हुए थे, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में 5,93,999 तक पहुंच गए. यानी पांच वर्षों में करीब 573 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. एडिशनल हेल्थ डायरेक्टर डॉ नरोत्तम शर्मा ने बताया कि डॉग बाइट एक आम समस्या है. हमने पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों तक वैक्सीनेशन की व्यवस्था की है. आमतौर पर घाव के हिसाब से पीड़ित को ट्रीटमेंट दिया जाता है. लोगों को जागरूक रहने की आवश्यकता है. जब भी कोई घाव हो तो उसे तुरंत साफ कर ले. एंटीसेप्टिक लगाने का प्रयास करें. तुरंत निकटतम अस्पताल में जाकर चिकित्सीय सहायता ले.
सालवार डॉग बाइट के मामले
- वर्ष - मामले
- 2021-22 - 88,259
- 2022-23 - 2,78,244
- 2023-24 - 4,27,806
- 2024-25 - 4,60,309
- 2025-26 - 5,93,999
- कुल- 18,42,617
2025-26 में सबसे ज्यादा मामले वाले जिले
साल 2025-26 में डॉग बाइट के मामलों में प्रदेश में अलवर जिले में सर्वाधिक 47 हजार 910 मामले सामने आए. इसके बाद श्रीगंगानगर में 38 हजार 331, बीकानेर में 35 हजार 796 डीग में 34 हजार 087, जयपुर में 33 हजार 595 और धौलपुर में 32 हजार 688 मामले सामने आए.

टॉप-10 जिले -
- अलवर – 47,910
- श्रीगंगानगर – 38,331
- बीकानेर – 35,796
- डीग – 34,087
- जयपुर – 33,595
- धौलपुर – 32,688
- व्यावर – 29,430
- कोटा – 29,173
- हनुमानगढ़ – 27,184
- भीलवाड़ा – 23,858
कुछ प्रमुख जिलों की स्थिति
- जयपुर : 33,595 मामले
- अलवर : 47,910 मामले
- अजमेर : 20,765 मामले
- जोधपुर : 6,711 मामले
- उदयपुर : 3,508 मामले
- कोटा : 29,173 मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डॉग बाइट के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन न लगने पर रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. राज्य में बढ़ते डॉग बाइट के मामले आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण, नसबंदी कार्यक्रम, एंटी-रेबीज टीकाकरण और जागरूकता अभियानों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.