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This Article is From Feb 26, 2026

जिला मुख्यालय से महज 2 KM दूर बसा सरवर पूरा गांव, आजादी के 75 साल बाद भी सड़क और पानी को तरस रहा 

राजस्थान में बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर सरवर पूरा गांव आज भी सड़क पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. पर्यटन स्थल होने के बावजूद ग्रामीण विकास के इंतजार में हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

जिला मुख्यालय से महज 2 KM दूर बसा सरवर पूरा गांव, आजादी के 75 साल बाद भी सड़क और पानी को तरस रहा 
बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर सरवर पूरा गांव आज भी सुविधा के लिए जूझ रहा है.

Rajasthan News: राजस्थान में बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर स्थित सरवर पूरा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. आजादी के 75 साल बाद भी यहां सड़क पानी और शिक्षा जैसी मूल जरूरतें अधूरी हैं. शहर की सीमा से सटा होने के बावजूद गांव विकास की दौड़ में पीछे छूट गया है.

पर्यटन स्थल की पहचान पर हकीकत अलग

सरवर पूरा अपने प्राकृतिक सौंदर्य और प्रसिद्ध कड़ेलिया वॉटरफॉल के कारण पहचाना जाता है. हर साल यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. पहाड़ और हरियाली के बीच लोग तस्वीरें लेते हैं लेकिन गांव की वास्तविक स्थिति अलग कहानी बयान करती है. ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटन की बात तो होती है लेकिन गांव तक पहुंचने का रास्ता ही ठीक नहीं है.

अधूरी सड़क और जोखिम भरा सफर

गांव में आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई. वर्ष 2023 में सड़क निर्माण शुरू हुआ था जिससे उम्मीद जगी थी लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया. कच्चा और उबड़ खाबड़ रास्ता दुर्घटनाओं को न्योता देता है. बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं. गांव के बीच से गुजरने वाली नहर में तेज बहाव आने पर संपर्क मार्ग बंद हो जाता है और गांव शहर से कट जाता है.

गंदगी और जल संकट से बढ़ी परेशानी

सड़क और नालियों के अभाव में गंदा पानी गलियों में जमा रहता है जिससे बीमारी का खतरा बना रहता है. पेयजल संकट भी गंभीर है. अधिकतर हैंडपंप सूख चुके हैं और पाइपलाइन से नियमित पानी नहीं आता. गर्मियों में ग्रामीणों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है. महिलाएं रोज दूर से पानी लाने को मजबूर हैं.

शिक्षा भी अस्थायी व्यवस्था के सहारे

गांव में आज तक स्कूल भवन नहीं बन पाया है. बच्चों की पढ़ाई सामुदायिक भवन में होती है जहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं लेकिन व्यवस्था कमजोर है.

समाधान की मांग तेज

ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. उनका कहना है कि चुनाव के समय वादे होते हैं लेकिन बाद में गांव को भुला दिया जाता है. अब ग्रामीण स्थायी समाधान चाहते हैं ताकि शहर के पास बसा यह गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके.

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