राजस्थान से भाजपा सांसद और हरियाणा भाजपा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने राज्यसभा में पहला संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का उद्देश्य आम आदमी को सुविधा पहुंचाने के साथ उसे समय पर न्याय उपलब्ध कराना है. लोकतंत्र में आम व्यक्ति न्याय की उम्मीद करता है, लेकिन न्याय केवल मिलना ही पर्याप्त नहीं है. न्याय समय पर, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मिलना चाहिए और पूरी न्याय व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा कायम रहना चाहिए. मंगलवार (11 अगस्त) को पूनिया ने 'अधिकरण सुधार विधेयक-2026 (ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल)' पर विचार रखे. उन्होंने विधेयक को ट्रिब्यूनल व्यवस्था को व्यवस्थित, पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया.
5.24 लाख लंबित मामलों का किया जिक्र
डॉ. पूनिया ने ट्रिब्यूनल व्यवस्था की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि देश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग ट्रिब्यूनल काम करते रहे हैं. टैक्स, कंपनी, पर्यावरण, सशस्त्र बल, दूरसंचार, ऋण वसूली, शेयर बाजार और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग अधिकरणों के माध्यम से मामलों की सुनवाई होती रही है. उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनलों में बड़ी संख्या में मामले लंबित होने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती थी. उन्होंने करीब 5.24 लाख लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती थी.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में देश में 37 ट्रिब्यूनल कार्यरत थे, जिनमें 18 अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े थे. अकेले वित्त मंत्रालय के अधीन 12 ट्रिब्यूनल काम कर रहे थे. अलग-अलग ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली और क्षमता में अंतर के कारण भी कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आती थीं.
नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
डॉ. पूनिया ने कहा कि विधेयक के जरिए ट्रिब्यूनल व्यवस्था में नियुक्तियों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया गया है. नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन की व्यवस्था को उन्होंने महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी.
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय तक खाली रहने से मामलों के निस्तारण में देरी होती है. समयबद्ध नियुक्तियों से ट्रिब्यूनल अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकेंगे और लंबित मामलों के निस्तारण की गति बढ़ेगी.
ट्रिब्यूनल में विशेषज्ञों की भागीदारी को भी अहम बताया
पूनिया ने ट्रिब्यूनल में विशेषज्ञों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि तकनीकी, वित्तीय और वाणिज्यिक मामलों में लंबे अनुभव वाले विशेषज्ञों की मौजूदगी से निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी. विशेषज्ञता के आधार पर लिए गए निर्णय संबंधित क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं.
नेशनल ट्रिब्यूनल ग्रिड से होगी निगरानी
डॉ. पूनियां ने नेशनल ट्रिब्यूनल ग्रिड का उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्यवस्था ट्रिब्यूनलों के कामकाज की निगरानी और आंकड़ों के बेहतर प्रबंधन में उपयोगी साबित होगी. एक ही प्लेटफॉर्म पर लंबित मामलों, निस्तारित मामलों, रिक्त पदों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का डेटा उपलब्ध होने से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस ट्रिब्यूनल को कितने संसाधनों की जरूरत है और किस स्तर पर सुधार की आवश्यकता है.
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