Rajasthan Budget Session 2026: राजस्थान विधानसभा में 16वीं विधानसभा के 5वें सत्र से पहले कल (27 जनवरी) सर्वदलीय बैठक होगी. बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक योगेश्वर गर्ग, विपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान और विधायक सुभाष गर्ग, मनोज कुमार व थावरचंद शामिल होंगे. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि 27 जनवरी को दोपहर 3 बजे उनके चेंबर में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है. उन्होंने सभी दलों और सदस्यों से अपील की है कि वे बैठक में आकर सदन को बेहतर तरीके से चलाने के लिए अपने सुझाव दें. अध्यक्ष ने बताया कि सर्वदलीय बैठक लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने का एक प्रभावी मंच है. क्योंकि यह सदन की कार्यवाही में सभी दलों की भागीदारी सुनिश्चित करती है और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा का मार्ग प्रशस्त करती है.
बुलेटिन के बारे में भी जानिए
- इस बुलेटिन में कहा गया है कि यथासंभव विधायक 5 साल से पुराने विषयों पर सवाल न पूछें.
- जिन विषयों के जवाब विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन हैं, उनसे संबंधित सवालों को भी न पूछा जाए.
- राज्य स्तरीय की बजाय तहसील और विधानसभा क्षेत्र के सवाल पूछें. यथासंभव ज्यादा समय और संसाधन खपाने वाले सवाल पूछने से बचा जाए. 'तुच्छ' विषय से संबंधित सवाल सदन में ना पूछे जाएं.
विपक्ष ने जताई थी आपत्ति
सत्र के लिए जारी बुलेटिन के दिशा-निर्देशों पर कांग्रेस की ओर से आपत्ति भी जाहिर की गई थी. इस पर भी चर्चा होने की संभावना है. इस बुलेटिन में विधायकों की तरफ से लगाए जाने वाले सवाल के दायरे और उनकी प्रकृति को लेकर निर्देश थे. विधानसभा सचिवालय की ओर से बुलेटिन जारी होने के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कई दिग्गजों ने लोकतंत्र पर हमला बताया. उन्होंने कहा था कि विधायकों के सवाल पूछने के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र का अपमान है.
स्पीकर ने कांग्रेस कार्यकाल का किया था जिक्र
विधानसभा अध्यक्ष ने साफ किया, "जिस बुलेटिन पर आज सवाल उठाए जा रहे हैं, वह कोई नया नहीं है. उन्होंने साल 2020 के बुलेटिन संख्या 26 का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी यही निर्देश थे. उसके मुताबिक, यथासंभव बहुत लंबे प्रश्न नहीं होंगे और 5 साल से ज्यादा पुरानी जानकारी नहीं मांगी जाएगी. देवनानी ने सवाल उठाया कि अगर यह बुलेटिन 2020 से लागू है, तो फिर 2026 में आकर इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है?"
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