सीकर में माकपा का जन संघर्ष जत्था, लेबर कोड और बिजली बिल के खिलाफ गरजे नेता

सीकर सांसद अमराराम ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आयात शुल्क में भारी कटौती से विदेशी सामान देश में बड़ी मात्रा में आएगा, जिससे स्थानीय उद्योग, खेती और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

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Sikar News: सीकर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का जन संघर्ष जत्था पहुंचा, जहां शहर की कृषि उपज मंडी में आयोजित आमसभा में बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों ने भाग लिया. सभा के दौरान चार लेबर कोड को वापस लेने और श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई. मंच से वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि इन कानूनों के लागू होने से श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा कमजोर होगी और शोषण बढ़ेगा.

सभा में बिजली बिल 2025 को तुरंत वापस लेने और बिजली क्षेत्र के निजीकरण को रोकने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. वक्ताओं ने कहा कि बिजली कानून में बदलाव से आम उपभोक्ताओं और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन फैसलों को वापस नहीं लेती है तो देशभर में व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा.

सांसद अमराराम ने सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

सभा को संबोधित करते हुए सीकर सांसद अमराराम ने कहा कि मौजूदा सरकार किसानों, मजदूरों और युवाओं के अधिकारों को खत्म करने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पहले काले कृषि कानूनों के जरिए किसानों पर हमला किया गया और अब बिजली कानून 2025 तथा बीज कानून के माध्यम से नई चुनौतियां खड़ी की जा रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 39 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड में समेट दिया गया है, जिससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे.

विदेशी व्यापार समझौतों पर भी जताई चिंता

अमराराम ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आयात शुल्क में भारी कटौती से विदेशी सामान देश में बड़ी मात्रा में आएगा, जिससे स्थानीय उद्योग, खेती और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में किसानों को लगभग 70 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जबकि भारतीय किसानों को केवल दो से तीन प्रतिशत सहायता ही मिलती है.

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24 मार्च की आक्रोश रैली को सफल बनाने का आह्वान

सभा में आगामी 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित आक्रोश रैली को सफल बनाने का आह्वान किया गया. वक्ताओं ने कहा कि किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और व्यापारी वर्ग को एकजुट होकर इन नीतियों के खिलाफ संघर्ष करना होगा. सभा के अंत में बड़ी संख्या में लोगों ने रैली में भाग लेने का संकल्प लिया और संघर्ष को गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्णय किया.