लड़कियों की फोटो-VIDEO वायरल की धमकी देने वालों की खैर नहीं, पुलिस का बड़ा एक्शन

साइबर पुलिस ने महिलाओं के ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़ी 5100 शिकायतों के विश्लेषण के बाद 698 सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए हैं. अब मनचलों के नेटवर्क और अपराध के पैटर्न को ट्रैक कर गंभीर मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है.

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लड़कियों की फोटो-VIDEO वायरल की धमकी देने वालों की खैर नहीं
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महिलाओं और लड़कियों को फोन या सोशल मीडिया पर परेशान करने वालों के खिलाफ राजस्थान साइबर पुलिस ने अब डिजिटल डंडा चलाना शुरू कर दिया है. फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी हो या लगातार कॉल और मैसेज से हरैसमेंट हो, साइबर पुलिस ने करीब 5100 शिकायतों का डेटा खंगाला है और इसी कार्रवाई के तहत अब तक 698 मोबाइल SIM ब्लॉक करवाए जा चुके हैं. खास बात ये है कि पुलिस अब सिर्फ एक शिकायत पर कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि डेटा एनालिसिस के जरिए ये भी पता लगा रही है कि कहीं एक ही नंबर या आरोपी कई महिलाओं को तो परेशान नहीं कर रहा. 

साइबर पुलिस की रडार पर अपराधी

राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम ने ऐसी शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार किया है, जो महिलाओं व लड़कियों को डराने धमकाने से जुड़ी हैं. पुलिस करीब 5100 शिकायतों के डेटा का अब विश्लेषण कर रही है. सभी डराने-धमकाने वाले अब साइबर पुलिस की रडार पर हैं. इन शिकायतों में सामने आए मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है.

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प्रथम दृष्टया शिकायत गंभीर और सही पाए जाने पर संबंधित मोबाइल नंबर की SIM को बंद करवाया जा रहा है. अब तक 698 SIM ब्लॉक करवाने की कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन साइबर पुलिस का डिजिटल डंडा सिर्फ SIM बंद करने तक सीमित नहीं है. गंभीर मामलों में स्थानीय थाना पुलिस को सूचना देकर FIR और कानूनी कार्रवाई भी करवाई जा रही है. 

शिकायतों के बीच कनेक्शन भी तलाश रही पुलिस

  • एक ही नंबर से कई महिलाओं को तो परेशान नहीं किया गया? 
  • एक ही आरोपी के खिलाफ अलग-अलग जिलों से शिकायतें तो नहीं आईं?
  • अलग-अलग नंबरों या सोशल मीडिया प्रोफाइल के पीछे एक ही आरोपी तो नहीं?

यानी अब साइबर पुलिस का फोकस एक शिकायत एक कार्रवाई से आगे बढ़कर अपराध के पूरे पैटर्न को पकड़ने पर है. साइबर अधिकारी सुमित मेहरडा ने बताया कि साइबर हरैसमेंट के कुछ मामलों में लंबे समय से परेशान किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं. कई मामलों में लगातार फोन, मैसेज या दूसरे डिजिटल माध्यमों से प्रताड़ित करने के आरोप हैं. पुलिस ऐसे मामलों का स्थानीय स्तर पर सत्यापन करवाती है.

आरोपों की पुष्टि और मामले की गंभीरता के आधार पर FIR की कार्रवाई की जाती है. यानी शिकायत पुरानी है तो भी उसे रिकॉर्ड से बाहर नहीं किया जा रहा है. राजस्थान में साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर यानी R4C के जरिए भी साइबर अपराध के डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है. स्टेट साइबर क्राइम स्तर पर डेटा एनालिसिस, जिला साइबर टीमों के जरिए तकनीकी और स्थानीय जांच और जरूरत पड़ने पर स्थानीय थाना पुलिस के जरिए FIR, तीनों स्तर पर कार्रवाई का नेटवर्क तैयार किया गया है.