2026 में 19 मार्च को मनाया जाएगा राजस्थान दिवस, इस दिन है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा... क्या है इसकी पूरी कहानी

राजस्थान दिवस के मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम जयपुर के अल्बर्ट हॉल परिसर में आयोजित किए जाएंगे. यहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोक कलाकारों के कार्यक्रम और प्रदेश की परंपरा व विरासत को दर्शाने वाले आयोजन होंगे.

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19 मार्च को होगा रास्थान दिवस

Rajasthan Diwas: राजस्थान में आने वाले 19 मार्च को पूरे प्रदेश में राजस्थान दिवस मनाया जाएगा. हालांकि पिछले साल यह 25 मार्च 2025 को मनाया गया था. जबकि उससे पहले यह 30 मार्च को मनाया जाता था. लेकिन इस बार राज्य सरकार ने राजस्थान दिवस मनाने का पैमाना बदल दिया है. इसके तहत 19 मार्च को राजस्थान दिवस मनाने का फैसला किया है. क्योंकि इस दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है और इसके आधार पर ही राजस्थान दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है. राजस्थान दिवस को लेकर पर्यटन विभाग ने तैयारियों शुरू कर दी है. इसके साथ ही राजधानी जयपुर समेत पूरे प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारियां शुरू हो गई है.

बताया जा रहा है कि राजस्थान दिवस के मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम जयपुर के अल्बर्ट हॉल परिसर में आयोजित किए जाएंगे. यहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोक कलाकारों के कार्यक्रम और प्रदेश की परंपरा व विरासत को दर्शाने वाले आयोजन होंगे. इन कार्यक्रमों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहरों को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा.

हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर मनाया जा रहा राजस्थान दिवस

राजस्थान दिवस हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही मनाए जाने की परंपरा शुरू की गई है. राजस्थान दिवस मनाने की परंपरा 1949 से शुरू हुई थी. लेकिन इसे मनाने की तारीख 30 मार्च थी. लेकिन अब हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के मुताबिक राजस्थान दिवस मनाने की तारीख तय की जाती है.पर्यटन विभाग के अनुसार राजस्थान दिवस को लेकर जयपुर के अलावा जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, उदयपुर और अन्य शहरों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, लाइट एंड साउंड शो, लोक नृत्य और पर्यटन से जुड़े आयोजन किए जा सकते हैं. विभाग की ओर से इस संबंध में रूपरेखा तैयार की जा रही है.

क्यों मनाते हैं राजस्थान दिवस

ऐसा कहा जाता है कि 30 मार्च 1949 को ऐतिहासिक रूप से जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर समेत अन्य कई रियासतों का विलय किया गया था, और इसके साथ ही वृहत्तर राजस्थान संघ का गठन किया गया था. इससे पहले यह राजपूताना नाम से जाना जाता था. लेकिन 19 रियासतों के विलय के बाद इसका नाम राजस्थान किया गया था. राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में हुआ है. पहले 1948 में अलवर, धौलपुर, करौली और भरतपुर की रियासत का विलय हुआ. फिर कई चरणों में अन्य रियासतों का विलय हुआ. जबकि आखिर में 1949 में जैसलमेर, जोधपुर, जयपुर और बीकानेर रियासतों का विलय कर इसका नाम वृहत्तर राजस्थान संघ रखा गया. इस दिन को लेकर राजस्थान दिवस मनाया जाने लगा.

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1 नवंबर को मनाया जाता है राजस्थान स्थापना दिवस

राजस्थान दिवस के अलावा राजस्थान स्थापना दिवस भी मनाया जाता है, जो 1 नवंबर को मनाया जाता है. ऐसा इसलिए कि 1 नवंबर 1956 को राजस्थान की स्थापना हुई थी. जो आज वर्तमान राजस्थान है. 1956 में अंतिम रियासत अजमेर मेरवाड़ा का विलय होने के बाद राजस्थान बना. 

राजस्थान दिवस पर विरासत प्रदर्शित किया जाता है

यानी जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर सहित कई रियासतों के विलय के बाद वृहत्तर राजस्थान संघ का गठन हुआ तो इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया के आधार पर हर साल राजस्थान दिवस मनाया जाता है. राज्य सरकार इस दिन को प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में मनाती है.राजस्थान दिवस के अवसर पर प्रदेश के पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख शहरों में विशेष सजावट, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, ताकि प्रदेश की समृद्ध परंपरा और विरासत को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके.

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