राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था पर संकट: खाली पदों और पदोन्नति में देरी से एडम‍िशन बढ़ाना चुनौती

प्रदेश में हजारों शिक्षक और अधिकारी पदोन्नति के बाद भी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं. स्‍कूलों में कई श‍िक्षक आर प्रिंस‍िपल के पद भी खाली हैं. 

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फाइल फोटो.

राजस्‍थान सरकार 1 अप्रैल से स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए नया फॉर्मूला लागू करने जा रही है. इसके तहत टीचर घर-घर जाकर बच्‍चों के एडम‍िशन के ल‍िए अभ‍िभावकों से संपर्क करेंगे. इसके साथ ही 'प्रवेश उत्सव' का पहला चरण भी शुरू हो चुका है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ना है, लेकिन शिक्षा विभाग की जमीनी हकीकत इस अभियान की सफलता पर सवाल खड़े कर रही है. स्‍कूलों में रिक्त पदों और पदोन्नति में देरी से नामांकन बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है.

वर्तमान स्थिति के अनुसार

  • करीब 3800 प्रिंसिपल
  • लगभग 10,000 वाइस प्रिंसिपल
  • पदोन्नति के बाद भी नियुक्ति नहीं पा सके हैं, इससे स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है. 

शिक्षकों के हजारों पद खाली

  • शिक्षा विभाग में लंबे समय से पद खाली पड़े हैं, जिसका सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता और नामांकन पर पड़ रहा है.
  • 42,000 वरिष्ठ अध्यापक पद रिक्त. 
  • लेक्चरर (व्याख्याता) पदों पर 3 साल से डीपीसी नहीं.
  • तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक पदोन्नति मामला अदालत में लंबित.
  • इन कारणों से नए सत्र में भी कई स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे.

 नामांकन में लगातार गिरावट

पिछले तीन वर्षों से सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है. इसका मुख्य कारण विभिन्न कैडर में 1 लाख से अधिक पदों का खाली होना माना जा रहा है. पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से अभिभावक निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं.

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पाली जिले की स्थिति चिंताजनक

  • पाली जिले के आंकड़े शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं. 
  • लेक्चरर के 504 पद खाली.
  • सेकंड ग्रेड के 1506 पद खाली.
  • कुल 14,004 स्वीकृत पदों में से 9715 पद भरे हुए हैं. 4289 पद खाली है. 

बिना स्वीकृत पदों के हजारों स्कूल 

प्रदेश में करीब 5000 स्कूल ऐसे हैं, जहां पद ही स्वीकृत नहीं हैं. पिछले 5 वर्षों में सरकार ने 5000 से अधिक स्कूलों का क्रमोन्नयन तो किया, लेकिन एक भी स्कूल में व्याख्याता पद स्वीकृत नहीं किया गया. कई स्कूलों में 12वीं तक की पढ़ाई सेकंड और थर्ड ग्रेड शिक्षकों के भरोसे चल रही है. 

नए सत्र में भी पुराने हालात

इन सभी समस्याओं को देखते हुए साफ है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत भी पुरानी चुनौतियों के साथ ही होगी. शिक्षक की कमी, पदोन्नति में देरी और संरचनात्मक कमजोरियों के चलते नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा. सरकार के प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को जल्द भरा जाए, लंबित पदोन्नतियों को पूरा किया जाए और स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.  वरना नामांकन बढ़ाने के अभियान केवल कागजों तक सीमित रह सकते हैं. 

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