राजस्थान के किसानों की बल्ले-बल्ले! अब इन 24 जिलों में मिलेगी दिन में बिजली, CM भजनलाल शर्मा का बड़ा ऐलान

PM Kusum Yojana Rajasthan Update: अब राजस्थान के 24 जिलों के किसानों को खेती के लिए दिन के दो ब्लॉक में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सोमवार रात अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की है.

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राजस्थान के किसानों की 'रात की ड्यूटी' खत्म, 24 जिलों में अब दिन में होगी सिंचाई; जानें भजनलाल सरकार का पूरा प्लान
ANI

Rajasthan Farmer Electricity News: राजस्थान के दौसा और करौली जिले के 87,801 किसानों के लिए अब रात की खेती का दौर खत्म हो गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन दोनों जिलों में भी कृषि उपभोक्ताओं को दिन के दो ब्लॉक में बिजली देने का बड़ा फैसला लिया है. इस घोषणा के साथ ही प्रदेश के अब कुल 24 जिलों के किसानों को कड़ाके की ठंड, बारिश और जंगली जानवरों के खतरे के बीच रात में सिंचाई करने की मजबूरी से परमानेंट मुक्ति मिल गई है.

क्या आपकी जेब पर भी पड़ेगा असर?

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ दौसा के 52,460 और करौली के 35,341 कृषि उपभोक्ताओं को मिलेगा. अब उन्हें खेती के लिए पर्याप्त वोल्टेज और निर्बाध बिजली दिन के उजाले में ही उपलब्ध होगीऋ जयपुर विद्युत वितरण निगम ने इन दोनों जिलों को अब उस श्रेणी में शामिल कर दिया है जहां बिजली का शेड्यूल पूरी तरह किसान की सुविधा के अनुसार तय किया गया है. लेकिन यह राहत केवल इन दो जिलों तक सीमित नहीं है. जयपुर डिस्कॉम के 9, अजमेर के 12 और जोधपुर के 3 जिलों में भी अब सूरज की रोशनी में ही सिंचाई का काम निपटाया जा सकेगा.

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24 नए ग्रिड और 'सोलर बैकअप' तैयार

तकनीकी रूप से इस बड़े बदलाव को संभव बनाने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने दोनों जिलों के बिजली ढांचे को पूरी तरह अपग्रेड किया है. दौसा में 18 और करौली में 6 नए ग्रिड सब-स्टेशन (33 KV) स्थापित किए गए हैं ताकि लोड बढ़ने पर ट्रिपिंग की नौबत न आए. इसके साथ ही, भारी लोड को संभालने के लिए दौसा के 47 और करौली के 15 सब-स्टेशनों पर ट्रांसफार्मरों की क्षमता (MVA) में रिकॉर्ड वृद्धि की गई है. इस पूरी व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी पीएम कुसुम योजना के तहत लगे 17 सौर ऊर्जा संयंत्र हैं, जो करीब 32 मेगावाट बिजली सीधे ग्रिड को सप्लाई कर रहे हैं.

जानिए क्या है 'मिशन 2027' का ब्लूप्रिंट

मुख्यमंत्री का यह कदम सिर्फ बिजली सप्लाई का सुधार नहीं, बल्कि किसानों की सुरक्षा का 'सुरक्षा कवच' है. रात के अंधेरे में पैंथर जैसे जंगली जानवरों के हमले और कड़ाके की सर्दी में होने वाले हादसों से अब अन्नदाता सुरक्षित रहेगा. सरकार का निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2027 तक राजस्थान के हर एक जिले को चरणबद्ध तरीके से रात की बिजली से पूरी तरह मुक्त करना है. यानी आने वाले समय में प्रदेश का हर किसान अपनी शाम और रात का वक्त खेतों के बजाय अपने परिवार और बच्चों के साथ सुकून से बिता पाएगा.

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