Worker Daily Wage Increase: राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलवार (10 मई) को दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी को लेकर बड़ा फैसला लिया है. जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश जारी किए गए हैं. दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को साफ निर्देश दिए हैं कि दिहाड़ी मजदूरों (दैनिक वेतन भोगियों) की न्यूनतम मजदूरी की गणना महीने के 26 दिनों की बजाय 30 दिनों के आधार पर की जाए। कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी भुगतान संबंधी अधिसूचनाओं और परिपत्रों में जरूरी संशोधन करने का आदेश दिया है.
दिहाड़ी मजदूरों को नहीं मिलती पेड़ लीव
कोर्ट ने कहा, "दिहाड़ी मजदूर को साप्ताहिक अवकाश या पेड लीव नहीं मिलती. वह रोटी कमाने के लिए हर दिन काम करता है, इसलिए 26 कार्य दिवसों के आधार पर आय गिनना उचित नहीं." जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने बेलदार लक्ष्मण कुमावत की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया.
मजदूर जिस दिन काम न करें भूखे रह जाते हैं
अदालत ने स्पष्ट किया कि श्रम कानून और फैक्ट्री एक्ट में महीने के 26 कार्य दिवस और 4 पेड हॉलिडे का प्रावधान है, जो कई उद्योगों में लागू होता है. लेकिन दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को न तो साप्ताहिक अवकाश मिलता है और न ही छुट्टी का भुगतान. ये गरीब मजदूर जिस दिन काम न करें, उस दिन भूखे रह जाते हैं. अवकाश का मतलब उनकी कमाई पर चोट है.
याचिका पर कोर्ट ने लिया यह फैसला
अपीलकर्ता लक्ष्मण कुमावत दैनिक वेतनभोगी बेलदार हैं. अगस्त 2020 में मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल होने पर ब्यावर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने उनकी आय 26 दिनों के आधार पर आंककर मुआवजा तय किया था. कुमावत ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी 30 दिनों से गिनते हुए मुआवजे में 33,040 रुपये की बढ़ोतरी का आदेश दिया. साथ ही, आदेश की प्रति केंद्र के श्रम मंत्रालय और राजस्थान श्रम विभाग के सचिवों को भेजने को कहा, ताकि दिहाड़ी मजदूरों के हित में संशोधन हो सके.
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