गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग से लेकर इलाज तक 'प्रसव सखी' करेंगी देखभाल, भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल को बेहतर बनाने की दिशा में 'प्रसव सखी' की व्यवस्था शुरू होगी. सरकार की ओर से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशील बदलाव बताया जा रहा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

राजस्थान में गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए नई पहल शुरू की जाएगी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरकारी अस्पतालों में ‘प्रसव सखी' व्यवस्था के निर्देश दिए हैं. यह योजना 'हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं' के लिए शुरू होगी. इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पेशेंट सेंट्रिक, रिस्पॉन्सिव, समन्वित और सम्मानजनक बनाना है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों, जिला अस्पताल और अधिक प्रसव भार वाले पहली रेफरल यूनिट्स (FRU) में लागू की जाएगी. 

ऐसे काम करेंगी 'प्रसव सखी'

नई व्यवस्था के तहत पिंक एप्रिन में तैनात प्रशिक्षित नर्सिंगकर्मी, एएनएम या अन्य चयनित महिला स्वास्थ्यकर्मी ‘प्रसव सखी' के रूप में कार्य करेंगी. वे अस्पताल पहुंचने वाली हाई रिस्क गर्भवती महिला के साथ उन्हें भर्ती करने से लेकर प्रसव, देखभाल और डिस्चार्ज तक हर चरण में सहयोग करेंगी. पंजीयन, जांच, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार, विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल प्रक्रिया में भी समन्वय सुनिश्चित करेंगी.

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हर पल की मॉनिटरिंग और सुरक्षित प्रसव को मिलेगा बढ़ावा- राठौड़

प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि हर हॉस्पिटल में 24×7 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे, जो गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के लिए पहले संपर्क केंद्र होंगे. हेल्प डेस्क पर तैनात प्रसव सखी अस्पताल की विभिन्न सेवाओं, जांचों और उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ मरीजों एवं परिजनों का मार्गदर्शन करेंगी. 

हेल्प डेस्क, 104 जननी एक्सप्रेस और प्रसव सखी की एकीकृत व्यवस्था के जरिए घर से अस्पताल तक सुरक्षित परिवहन और अस्पताल में निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी. हाई रिस्क गर्भवतियों को परिवहन और उपचार में प्राथमिकता दी जाएगी.

उन्होंने बताया कि यह पहल हाई रिस्क गर्भवतियों की सतत निगरानी, समय पर उपचार, प्रभावी रेफरल प्रबंधन और सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देगी. साथ ही गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में अधिक सम्मानजनक, सहज और गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.

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