पहली बार चुनाव के ऐलान से पहले शेड्यूल सार्वजनिक! आयोग ने कोर्ट को बताई तारीख, आचार संहिता का क्या होगा?

राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनावी कार्यक्रम पेश किया है. ऐसे में प्रशासनिक-राजनीतिक गलियारों में आदर्श आचार संहिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में हो रही देरी को लेकर चल रहे मामले में हाईकोर्ट के दखल के बाद एक नया संवैधानिक और प्रशासनिक सवाल खड़ा हो गया है. राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार (20 जुलाई) को राजस्थान हाई कोर्ट के समक्ष चुनाव कार्यक्रम पेश करते हुए पूरा प्लान बताया. सरकार ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद 15 अगस्त तक आरक्षण की लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. निर्वाचन आयोग ने बताया कि शहरी निकायों के चुनाव दो चरण और जबकि पंचायतीराज के चुनाव चार चरण में होंगे. 

आयोग ने अधिसूचना जारी होने की तारीख के साथ ही नामांकन की आखिरी तारीख और नतीजों की तारीख तक पूरी योजना कोर्ट के सामने रख दी. इसके साथ ही मीडिया के जरिए यह जानकारी सार्वजनिक हो गई है. हालांकि, इस चुनावी कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा आयोग ने अभी तक नहीं की है. लेकिन यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रदेश में आदर्श आचार संहिता प्रभावी मानी जाए या नहीं?

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आयोग ने बताया निकाय चुनाव का पूरा शेड्यूल

चुनाव घोषणा: 17 अगस्त 2026

सदस्य पद के लिए-

लोक सूचना जारी: 22 अगस्त 2026
नामांकन की अंतिम तिथि: 27 अगस्त 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 29 अगस्त 2026
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026, दोपहर 3 बजे तक
चुनाव चिन्ह आवंटन: 1 सितंबर 2026
मतदान- प्रथम चरण: 6 सितंबर 2026 और दूसरा चरण: 9 सितंबर 2026
मतगणना: 11 सितंबर 2026

अध्यक्ष पद के लिए-

लोक सूचना: 12 सितंबर 2026
नामांकन की अंतिम तिथि: 14 सितंबर 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 15 सितंबर 2026
नामांकन वापसी: 16 सितंबर 2026
चुनाव चिन्ह आवंटन: नामांकन वापसी का समय समाप्त होते ही
मतदान और मतगणना: 19 सितंबर 2026
मतदान का समय: सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
मतगणना: मतदान समाप्ति के तुरंत बाद

सवाल- चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है?

संवैधानिक प्रावधानों और परंपरा के मुताबिक जैसे ही चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा होती है, वैसे ही आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाती है. हालांकि, वर्तमान स्थिति में आयोग ने केवल हाईकोर्ट के समक्ष चुनाव कार्यक्रम प्रस्तुत किया है, जबकि इसकी औपचारिक अधिसूचना या सार्वजनिक घोषणा अभी जारी नहीं की गई है.

बावजूद इसके राजनीतिक दलों, सरकार और नौकरशाही के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या इसे चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत माना जाए या फिर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने तक आदर्श आचार संहिता लागू नहीं होगी? 

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औपचारिक घोषणा से कैसे अलग है कोर्ट को बताया शेड्यूल?

अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से चुनाव कार्यक्रम को अदालत में प्रस्तुत किए जाने और उसकी औपचारिक घोषणा के बीच की स्थिति को किस तरह देखा जाएगा? लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व मुखिया और रिटायर्ड आईएएस मधुकर गुप्ता बताते हैं कि आयोग की तरफ से हाईकोर्ट में कार्यक्रम देना और इसकी आधिकारिक घोषणा करना दोनों अलग-अलग पहलू हैं. 

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मधुकर गुप्ता ने कहा कि अगर आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करता और यह कहता कि इस घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता प्रभाव में आ जाएगी, तो वह लागू होती. उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति तो हाईकोर्ट में आयोग के जवाब से बनी है. इस कार्यक्रम के आधार पर आदर्श आचार संहिता को प्रभावित नहीं माना जा सकता.

राज्य निर्वाचन आयुक्त बोले- कोर्ट को संभावित कार्यक्रम बताया

वहीं, राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह का कहना है, "आयोग ने अभी अपनी तरफ से हाईकोर्ट में संभावित कार्यक्रम दिया है. इसे आधिकारिक रूप से 17 अगस्त को घोषित किया जाना था, लेकिन कोर्ट ने ही इसमें 15 अगस्त को घोषित करने किए जाने का सुझाव दिया है." राजेश्वर सिंह ने कहा कि ऐसे में आदर्श आचार संहिता 15 अगस्त से लागू मानी जाएगी. साथ ही अपनी बात जोड़ते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अगर दो दिन पहले चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा तो इस बात की भी संभावना बन रही है कि पूरे कार्यक्रम में प्रत्येक चरण 2-2 दिन पहले हो जाए.

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