राजस्थान में आधी रात पुलिस का बड़ा ऑपरेशन, रेंगते पहुंचे कमांडो; 90 करोड़ की MD ड्रग्स पकड़ी

तस्करों को पुलिस के ऑपरेशन की भनक न लगे, इसके लिए पुलिस को करीब 3 घंटे तक रेंगकर वहां तक पहुंचना पड़ा. यह अधूरा बना ढांचा ऊंचाई पर था, जहां से तस्कर आसपास की हर गतिविधि पर नजर रख सकते थे. 

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
राजस्थान में आधी रात पुलिस का बड़ा ऑपरेशन

राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने ड्रग्स तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. ‘ऑपरेशन विषग्रहण' के तहत पुलिस ने जोधपुर-जैसलमेर हाईवे के पास बालेसर के एक सुनसान खेत में चल रही MD ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. पुलिस और तस्करों के बीच फायरिंग के बाद कई राज्यों में फैले नेटवर्क के 6 खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. तस्करों का यह गिरोह का काफी शातिर है. पकड़े जाने से बचने के लिए सभी आरोपी iPhone का इस्तेमाल करते थे और मोबाइल टावर की ट्रैकिंग से बचने के लिए केवल एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया ऐप्स पर ही बात करते थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बालेसर में पकड़ा गया गिरोह पुराने तस्करों का था, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है.

बाड़मेर का हापू राम गैंग का सरगना

गिरोह का सरगना हापू राम 2015 से 2018 के बीच जोधपुर जेल में रह चुका था और फिर 2019 और 2024 में उदयपुर में भी जेल गया. बाड़मेर का 28 वर्षीय हापू राम पहले डोडा चूरा की तस्करी करता था. वह पहले एक नेटवर्क का हिस्सा था, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना खुद का गिरोह बनाया. उसने अपने पुराने साथियों को चुना और MD ड्रग की तस्करी शुरू की. पुलिस को उसकी गतिविधियों का सुराग एक सोशल मीडिया ऐप से मिला, जिसका इस्तेमाल गैंग आपस में बातचीत के लिए कर रहा था. इसके बाद पुलिस ने उसका पीछा करना शुरू किया और करीब डेढ़ महीने तक निगरानी के बाद ऑपरेशन विषग्रहण शुरू करने का फैसला लिया गया. 

Advertisement
25 अप्रैल की आधी रात के बाद एंटी नारकोटिक्स फोर्स के कमांडो जोधपुर से निकले और करीब 1 बजे वे बालेसर पहुंचे. फिर यहीं से शुरू हुआ असली ऑपरेशन. MD ड्रग्स बनाने की यूनिट एक खेत में थी, जो आबादी से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर थी. 

3 घंटे रेंगकर पहुंची पुलिस 

तस्करों को पुलिस के ऑपरेशन की भनक न लगे, इसके लिए पुलिस को करीब 3 घंटे तक रेंगकर वहां तक पहुंचना पड़ा. यह अधूरा बना ढांचा ऊंचाई पर था, जहां से तस्कर आसपास की हर गतिविधि पर नजर रख सकते थे. फैक्ट्री को चारों तरफ से घेरने के बाद पुलिस ने अंदर मौजूद लोगों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन हापू राम और सुरक्षा प्रभारी अर्जुन ने छत से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. उधर घने अंधेरे की बीच नीचे मौजूद चार अन्य आरोपी भागने की कोशिश करने लगे. इस दौरान पुलिस ने कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी. पुलिस के जवानों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पिस्तौल नीचे रखो, हाथ ऊपर करो और धीरे-धीरे नीचे आओ, नहीं तो गोली मार दी जाएगी. जिंदा रहोगे तो जिंदगी का एक और मौका मिलेगा. लेकिन हापू राम और अर्जुन ने आत्मसमर्पण नहीं किया और दोनों तरफ से करीब 15 राउंड फायरिंग हुई. 

इसी दौरान भागने के लिए दोनों छत से जैसे कूदे तो अर्जुन को तुरंत पुलिस ने पकड़ लिया गया और उसका हथियार छीन लिया. यह एक विदेशी पिस्टल की नकली कॉपी थी. वहीं, हापू राम अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन छत से कूदने के दौरान उसकी टांग टूट गई और वह पकड़ा गया. दोनों को भागने के दौरान चोटें आईं. अधूरे बने उस भवन के अंदर पुलिस को करीब 176 किलो एमडी ड्रग्स बरामद हुई, जिसे सुखाया जा रहा था, ताकि आगे प्रोसेस कर सप्लाई किया जा सके. इसकी अनुमानित कीमत करीब 90 करोड़ रुपये बताई जा रही है, क्योंकि एक किलो MD की कीमत लगभग 30 लाख रुपये होती है. 

गिरोह की लोकेशन ट्रेस करना नहीं था आसान

पुलिस को हापू राम और उसके साथियों की लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल काम था, क्योंकि वे आपस में केवल एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए ही बात करता था. दिलचस्प बात यह है कि सभी iPhone का इस्तेमाल कर रहे थे, ताकि वे ऐसे ऐप्स पर बातचीत कर सकें, जिन्हें मोबाइल टावर के जरिए ट्रैक करना मुश्किल होता है. इसलिए पुलिस ने उनकी सप्लाई चेन के जरिए निगरानी शुरू की और पुलिस को उस समय बड़ी कामयाबी हासिल हुई, जब बालेसर के एक दूरस्थ स्थान पर बड़ी मात्रा में आइस की सप्लाई की जानकारी मिली. MD ड्रग बनाने में आइस एक महत्वपूर्ण घटक होता है. इसी आइस सप्लाई चेन की जानकारी से पुलिस इस गैंग को पकड़ने में सफल रही.  

गिरफ्तार तस्कर
Photo Credit: NDTV

इस गैंग का सरगना हापू राम था और उसी ने बाकी सदस्यों को जोड़ा था, नरेश मुख्य केमिस्ट था. वहीं, बालेसर का निवासी अर्जुन के जिम्मे फैक्ट्री की सुरक्षा थी और उसी ने पुलिस पर फायरिंग की थी. श्रवण और बुधराम केमिस्ट की मदद करते थे और डिलीवरी का काम संभालते थे. नरेंद्र प्रोडक्शन का प्रभारी था और वह पहले हैदराबाद जेल में रह चुका था, जो काफी अनुभवी था. इन सभी के बीच एक समान कड़ी थी, बाड़मेर का धोरीमन्ना इलाका, जहां से कई लोग जुड़े हुए थे. जिस अधूरे मकान में फैक्ट्री चल रही थी, वह अर्जुन के चाचा जिया राम का था. इसे गिरोह को 2.5 लाख रुपये में किराए पर दिया गया था, जबकि इसकी वास्तविक कीमत करीब 5,000 रुपये ही थी. छापे के समय जिया राम मौके पर मौजूद नहीं था. गोलीबारी की आवाज सुनकर वह फरार हो गया.

Advertisement

MD ड्रग्स के एक बड़े नेटवर्क में केमिकल्स गुजरात और महाराष्ट्र से लाए जाते थे, जबकि जोधपुर, सांचोर, बाड़मेर और जालौर जैसे जिलों के सुनसान इलाकों में ड्रग्स बनाई जाती थी. इसके बाद इन्हें गुजरात के रास्ते महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भेजा जाता था, जबकि बीकानेर के जरिए उत्तर भारत और पंजाब तक सप्लाई की जाती थी. पिछले एक साल में राजस्थान में 33 MD ड्रग फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, जिनमें से 31 जोधपुर, जालौर, सांचोर और बाड़मेर में मिली हैं.