Rajasthan News: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनान होने हैं और चुनाव से पहले पंजाब में पानी से ज्यादा राजनीति रंग बदलती नजर आ रही है. राजस्थान से पानी की 1 लाख 44 हजार करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांग से भी साफ तौर पर यही दिख रहा है. इस पानी की रॉयल्टी मांग ने राजस्थान और पंजाब सरकार के बीच नई रार खड़ी कर दी है, लेकिन सरकार के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत कहते हैं कि पंजाब की सरकार को ब्रिटिश हुकूमत की तरह बर्ताव करना छोड़ कर, फेडरल सिस्टम के तहत राष्ट्रवाद की भावना पर काम करना चाहिए.
पंजाब के मुख्यमंत्री को नसीहत
जल संसाधन मंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को नसीहत देते हुए कहा कि पानी और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों पर रॉयल्टी ना तो दी जाती है और ना ही ली जाती है. इस बीच कांग्रेस ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार से दखल की मांग कर दी है. सुरेश रावत ने कहा कि 1920 के जिस समझौते का जिक्र वे कर रहे हैं, वह तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत, बहावलपुर रियासत और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था. उन्होंने ने कड़े शब्दों में कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री को ब्रिटिश हुकूमत की सोच से बाहर निकलना चाहिए.
मंत्री रावत ने कहा कि सिर्फ पंजाब सरकार के कहने से कोई बात फाइनल नहीं हो जाती. भाखड़ा–ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड पानी का बंटवारा तय करता है और यह सब फैसला केंद्र सरकार पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि BBMB में पंजाब के प्रतिनिधि भी हैं. वहीं, कांग्रेस विधायक दल के सचेतक रफीक खान ने कहा कि इस मुद्दे पर पंजाब का दावा भी गलत है और राजस्थान के मंत्री की प्रतिक्रिया भी गलत. यह मुद्दा केंद्र सरकार से जुड़ा है, लिहाजा केंद्र दोनों राज्यों के साथ बैठकर बात करे और स्थिति साफ करे.
कांग्रेस नेता ने बयान को बताया बेतुका
कांग्रेस नेता रफीक खान पंजाब के मुख्यमंत्री के बयान को बेतुका और बेवजह का शगुफा छेड़ने वाला मानते हैं. वह कहते हैं कि केंद्र सरकार ही इसका समाधान कर सकती है. जल संसाधन मंत्री बयान की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े करते हुए एक आशंका और जता रहे हैं. उनका अंदेशा इस बात को लेकर है कि पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है, ऐसे में हो सकता है, वे इस मुद्दे को चुनावों से पहले हवा देने की कोशिश कर रहे हों.
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