राजस्थान में SOG की बड़ी कार्रवाई, फर्जी उम्मीदवारों के नेटवर्क का भंडाफोड़; 2 सरकारी टीचर सहित 3 गिरफ्तार

एसओजी का कहना है कि जाली दस्तावेजों के कारण फर्जी उम्मीदवारों की पहचान करना बेहद चुनौतीपूर्ण था. हालांकि, पेरिस देशमुख के नेतृत्व में विशेष सॉफ्टवेयर और उन्नत विश्लेषण की मदद से सटीक पहचान और गिरफ्तारियां संभव हो पाईं. 

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फर्जी उम्मीदवारों के नेटवर्क का भंडाफोड़

राजस्थान में भर्ती परीक्षा में बैठने वाले डमी कैंडिडेट के खिलाफ एसओजी की कार्रवाई लगातार जारी है. एक के बाद एक एक्शन के बीच राज्य भर में फर्जी उम्मीदवारों से जुड़े तीन बड़े मामलों का पता चला है. पढ़ाई में कमजोर मूल अभ्यर्थी अपनी जगह अधिक योग्य व्यक्तियों को परीक्षा में बैठाने के लिए लाखों रुपये का सौदा कर रहे थे. पहला मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा 15 अक्टूबर, 2022 को आयोजित 2022 की लिटरेचर (हिंदी - स्कूल एजुकेशन) परीक्षा से जुड़ा है.

जालौर के मनोहर लाल ने 5 लाख में किया सौदा

जालौर के द्वितीय श्रेणी के शिक्षक मनोहर लाल ने लगभग 5 लाख रुपए के सौदे के बाद देराम के स्थान पर फर्जी उम्मीदवार बनकर परीक्षा दी. आरोपियों ने एडमिट कार्ड की फोटो और उपस्थिति रिकॉर्ड में हेराफेरी की. गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ पर बताया कि देराम पढ़ाई में अपेक्षाकृत कमजोर था और उसे विश्वास था कि वह खुद परीक्षा पास नहीं कर पाएगा, इसलिए उसने मनोहर लाल जैसे अपेक्षाकृत तेज और पढ़ाई में अच्छे व्यक्ति को अपनी जगह परीक्षा देने के लिए तैयार किया.

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दोनों के बीच लगभग 5 लाख रुपये में सौदा तय हुआ. मनोहर लाल ने प्रवेश पत्र पर फोटो बदलकर तथा उपस्थिति पत्रक में हेरफेर कर परीक्षा दी. दोनों की पहचान जोधपुर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग के दौरान हुई थी. इस मामले में मनोहर लाल को 01 मई 2026 को गिरफ्तार किया है. वहीं, मुख्य आरोपी देराम वर्तमान में फरार है, जिसकी तलाश जारी है. 

7.5 लाख लेकर दूसरे की जगह दी परीक्षा

वहीं, दूसरा मामला भी राजस्थान लोक सेवा आयोग की इसी परीक्षा से संबंधित है. फलौदी निवासी अशोक जानी ने पूर्व सैनिक रामूराम के स्थान पर 7.5 लाख रुपए में फर्जी उम्मीदवार बनकर परीक्षा दी. आरोपियों ने धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए पहचान संबंधी विवरणों में हेरफेर किया. रामूराम को पहले ही गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि अशोक जानी को 30 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था. 

तीसरा मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा 25 सितंबर, 2023 को आयोजित शारीरिक शिक्षा शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से संबंधित है. जालोर के ग्रेड तृतीय शिक्षक सुनील ने अनिल बिश्नोई नामक मध्यस्थ की मदद से विमल कुमार पाटीदार की ओर से परीक्षा दी. 6 लाख रुपए का सौदा हुआ, जिसमें से 1.5 लाख रुपए अग्रिम भुगतान किया गया था. सुनील और अनिल बिश्नोई दोनों को 1 मई को गिरफ्तार किया गया. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बंसल ने बताया कि सावधानीपूर्वक जाली दस्तावेजों के कारण फर्जी उम्मीदवारों की पहचान करना बेहद चुनौतीपूर्ण था. हालांकि, पेरिस देशमुख के नेतृत्व में विशेष सॉफ्टवेयर और उन्नत विश्लेषण की मदद से सटीक पहचान और गिरफ्तारियां संभव हो पाईं.