विदेश से MBBS की डिग्री, 20-25 लाख में FMGE सर्टिफिकेट... 15 फर्जी डॉक्टर और RMC रजिस्ट्रार गिरफ्तार

SOG की कार्रवाई में तत्कालीन RMC रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा और तत्कालीन नोडल अधिकारी अखिलेश माथुर समेत कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. उदयपुर से पकड़े गए आरोपी डॉ. यश पुरोहित एक प्राइवेट अस्पताल में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर डॉक्टर बनकर सेवाएं दे रहे थे

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15 फर्जी डॉक्टर और RMC रजिस्ट्रार गिरफ्तार

राजस्थान में एसओजी ने 'फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन' (FMGE) प्रमाण पत्रों के जरिए डॉक्टर बनने पर बड़ी कार्रवाई की है. फर्जी प्रमाण से डॉक्टर बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करके 18 लोगों को गिरफ्तार किया है. जानकारी के अनुसार, एक फर्जी प्रमाण पत्र जारी के लिए अभ्यर्थी से 20 से 25 लाख रुपये लिए जाते थे. गिरफ्तार लोगों में विदेश से MBBS डिग्री लेकर डॉक्टर बने 15 लोग और एक दलाल शामिल है. मामले में RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार और कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर होने के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी. 

फर्जी प्रमाण पत्र से इंटर्नशिप

SOG एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि कूट रचित (फर्जी) FMGE प्रमाण पत्रों के बारे में शिकायत मिलने पर जांच के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था. मामले की जांच में पता चला कि आरोपी पीयूष त्रिवेदी कूट रचित FMGE प्रमाण पत्र के आधार पर करौली में इंटर्नशिप कर रहा था. इस पर उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में उसने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने में देवेंद्र, शुभम और भानाराम की भूमिका रही. एसओजी ने इन लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया. 

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RMC रजिस्ट्रार और अधिकारियों की मिलीभगत

जांच में यह भी पता चला कि फर्जी FMGE प्रमाण पत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) से अवैध रूप से इंटर्नशिप और पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) प्राप्त करवाने वाला एक संगठित गिरोह सक्रिय है. जांच में RMC के तत्कालीन रजिस्ट्रार और कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई. अब तक की जांच में 90 से अधिक ऐसे डॉक्टर चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने फर्जी FMGE प्रमाण पत्रों के आधार पर इंटर्नशिप या रजिस्ट्रेशन हासिल किया.

RMC रजिस्ट्रार समेत 18 लोग गिरफ्तार

इस कार्रवाई में तत्कालीन RMC रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा और तत्कालीन नोडल अधिकारी अखिलेश माथुर समेत कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. उदयपुर से पकड़े गए आरोपी डॉ. यश पुरोहित एक प्राइवेट अस्पताल में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर डॉक्टर बनकर सेवाएं दे रहे थे. जांच में यह सामने आया है कि तत्कालीन RMC रजिस्ट्रार और कर्मचारी दलालों के साथ मिलीभगत कर हर अभ्यर्थी से लगभग 20-25 लाख रुपये लेकर फर्जी इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराते थे. इसमें से लगभग 11 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी RMC के अधिकारियों या कर्मचारियों लेते थे, जबकि बाकी कीरकम दलालों में बंट जाती थी. 

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