Rajasthan: विधानसभा में गूंजा शिक्षक भर्ती का मुद्दा, विपक्ष ने खाली पदों और बैकलॉग पर सरकार को घेरा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के बैकलॉग पदों को आगामी भर्तियों में समायोजित किया जाएगा और सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा.

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भारत आदिवासी पार्टी के विधायक थावर चंद मीणा

Rajasthan News: प्रदेश में शिक्षकों के 70 हजार से अधिक खाली पदों का मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया गया. बीएपी विधायक थावरचंद ने सरकार से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि राज्य में विषयवार कितने पद रिक्त हैं और इन्हें भरने के लिए सरकार ने क्या समयसीमा तय की है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, इसलिए स्पष्ट रोडमैप सामने आना चाहिए.

इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जवाब देते हुए पिछली सरकार पर जिम्मेदारी डालते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने 6,264 स्कूलों का क्रमोन्नयन तो कर दिया, लेकिन करीब 50 हजार पद सृजित ही नहीं किए गए. उन्होंने कहा कि पद सृजित किए बिना स्कूलों को अपग्रेड करने से शिक्षकों की कमी और बढ़ी, जिसका असर अब सामने आ रहा है.

मंत्री ने सदन में क्या कहा? 

मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान सरकार ने 2,202 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है, जबकि 3,225 पदों के लिए वर्ष 2025 में भर्ती निकाली गई है. उन्होंने दावा किया कि अब तक कुल 72 हजार पदों पर भर्तियां की जा चुकी हैं और शेष रिक्तियों को भी चरणबद्ध तरीके से भरने की प्रक्रिया जारी है.

कांग्रेस उपनेता रामकेश मीणा ने क्या कहा? 

बहस के दौरान कांग्रेस विधायक रामकेश ने भाजपा के संकल्प पत्र का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया कि एक वर्ष के भीतर सभी रिक्त पद भरने का जो वादा किया गया था, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है. उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के वादों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए.

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एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के बैकलॉग पदों का मामला 

इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के बैकलॉग पदों को आगामी भर्तियों में समायोजित किया जाएगा और सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने मुख्यमंत्री की घोषणा दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार पांच वर्षों में चार लाख सरकारी नौकरियां देने के लक्ष्य पर काम कर रही है. शिक्षक भर्ती का मुद्दा फिलहाल सियासत के केंद्र में बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर सदन के भीतर और बाहर बहस तेज होने के संकेत हैं.

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