Vasudev Devnani in Rajasthan Vidhan sabha: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में उस समय माहौल गरमा गया जब सदन से मंत्रियों और अधिकारियों की अनुपस्थिति का मुद्दा उठा. इस विषय पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी व्यवस्था दी. साथ ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली.
टिकट के लिए मेहनत की, तो सदन में भी बैठें
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधायकों और मंत्रियों के सदन छोड़कर जाने के तरीके पर शुक्रवार हो रही कार्यवाही में गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने सभी विधायकों को दो टूक में खरी खरी सुनाई. साथ ही कहा कि जैसे ही प्रश्नकाल समाप्त होता है, विधायक एक साथ इस तरह बाहर निकलते हैं मानो किसी बंधन से मुक्त हुए हो. आप सभी बड़ी मेहनत से टिकट लेकर और चुनाव जीतकर यहां पहुंचे. इसलिए सदन की गरिमा बनाए रखें. जरूरी काम होता है तो हम भी उठते हैं, लेकिन दो-तीन करके जा सकते हैं. सभी एक साथ ना उठे, इससे व्यवस्था गड़बड़ा जाती है.अगर बहुत जरूरी काम हो तो एक-दो सदस्य जा सकते हैं, लेकिन एक साथ झुंड में बाहर निकलना सदन की व्यवस्था को बिगाड़ता है.
मंत्रियों और अधिकारियों के लिए 'अनिवार्य' उपस्थिति
व्यवस्था देने से पहले स्पीकर ने स्पष्ट किया कि जिन मंत्रियों के विभागों से जुड़े विषयों पर पर्चियां, स्थगन प्रस्ताव या नियम 295 के तहत सूचनाएं आती हैं, उन्हें अपने विभाग से संबंधित व्यक्ति के साथ दीर्घा में मौजूद रहना जरुरी होगा. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री को इसे सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए.
जूली और पटेल में भिड़ंत
स्पीकर की व्यवस्था के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सदन को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार के मंत्री और अधिकारी नियमों की पालना करेंगे. हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर चुटकी लेते हुए कहा कि दिल्ली से मिलने वाले निर्देशों के चक्कर में सभ्यता को नहीं भूलना चाहिए. इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पलटवार करते हुए तंज कसा. जूली ने सदन में हाथ जोड़कर कहा कि अध्यक्ष जी, आप डांट लगाते हैं और मंत्री जी पालना का वादा करते हैं, लेकिन बाद में अपनी बात से मुकर जाते हैं. संसदीय कार्य मंत्री जिस सभ्यता की बात कर रहे हैं, ऐसी सभ्यता मैंने पहले कभी नहीं देखी.
यह भी पढ़ें; "मस्जिदों के लाउडस्पीकर की आवाज कम करो, नहीं तो लोग शहर छोड़ देंगे", बालमुकुंद आचार्य का बड़ा बयान