Rajasthan: कौन है इसका ज़िम्मेदार? बारां में कबाड़ बन गईं दिव्यांगजनों के लिए आईं 200 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिलें

करीब 21 लाख रुपये कीमत की ये ट्राईसाइकिलें दिव्यांगजनों के आवागमन के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती थीं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते लाभार्थी अब भी सुविधा से वंचित हैं.

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खुले में कबाड़ हो गईं मोटराइज्ड ट्राईसाइकिलें

Baran News: बारां जिले की अंता विधानसभा क्षेत्र में सरकारी योजना की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है, जहां दिव्यांगजनों के लिए खरीदी गई मोटराइज्ड ट्राईसाइकिलें पिछले दो साल से अधिक समय से खुले में पड़ी-पड़ी कबाड़ बन रही हैं. अंता नगर पालिका क्षेत्र के बरड़िया बस्ती स्थित अंबेडकर भवन परिसर में करीब 50 बैटरी संचालित ट्राईसाइकिलें बिना उपयोग के खराब हो चुकी हैं, जिससे लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है.

जानकारी के अनुसार सितंबर 2023 में तत्कालीन मंत्री एवं विधायक प्रमोद जैन भाया ने विधायक कोष से दिव्यांगजनों के लिए 84 लाख रुपये की लागत से 200 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिलों को स्वीकृति दी थी. इनमें से 100 ट्राईसाइकिलें अंता नगर पालिका और 100 मंगरोल नगर पालिका क्षेत्र के लिए खरीदी गई थीं. अंता क्षेत्र में वर्ष 2023 के दौरान 50 ट्राईसाइकिलों का वितरण लाभार्थियों को कर दिया गया, जबकि शेष 50 ट्राईसाइकिलें विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण वितरित नहीं हो सकीं.

सरकार बदल गई, हालात जस के तस 

आचार संहिता समाप्त होने और सरकार बदलने के बावजूद इन ट्राईसाइकिलों का वितरण अब तक नहीं हो पाया है. खुले में पड़े रहने से उनकी बैटरियां और अन्य पार्ट्स जंग खा रहे हैं तथा आसपास उगी झाड़ियों के कारण हालत और खराब हो गई है. करीब 21 लाख रुपये कीमत की ये ट्राईसाइकिलें दिव्यांगजनों के आवागमन के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती थीं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते लाभार्थी अब भी सुविधा से वंचित हैं.

उपकरणों को भारी नुकसान हुआ

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ट्राईसाइकिलों को किसी सुरक्षित और कवर्ड स्थान पर रखा जाता तो उनकी यह स्थिति नहीं होती. प्रशासन स्तर पर उचित रखरखाव और संरक्षण किया जाता तो सरकारी धन की बर्बादी रोकी जा सकती थी. खुले में लंबे समय तक रखे जाने से उपकरणों को भारी नुकसान हुआ है, जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है.

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क्या कहते हैं दिव्यांग संघ के पदाधिकारी? 

दिव्यांग संघ के प्रदेशाध्यक्ष आफाक खान ने बताया कि इस मामले की जानकारी बारां कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों को पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि यदि समय रहते ट्राईसाइकिलों की मरम्मत और बैटरियां बदल दी जाएं तो इन्हें फिर से उपयोग में लाया जा सकता है. उन्होंने मांग की कि जरूरतमंद दिव्यांगजनों को जल्द ट्राईसाइकिलें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनके रोजगार और दैनिक आवागमन में सुविधा मिल सके.