Rajasthan Politics: राजनीति में नेताओं के बयान और उनकी टाइमिंग की बड़ी अहमियत है. ये बयान आमतौर पर किसी भी पार्टी के नेता अपने प्रतिद्वंद्वी या विरोधी पार्टी के खिलाफ देते हैं, लेकिन कई बार नेताओं के बयान अपनों के बीच अपनों के लिए भी हो जाते हैं. हाल ही पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा ने पार्टी के प्रदर्शन के दौरान अपने भाषण में कई बातें कहीं, अब राजनीतिक जगत में उनके बयान के भी मायने निकाले जा रहे हैं. जहां कांग्रेस इसे सरकार और बीजेपी पर हमला बता रही है, तो बीजेपी का कहना है कि डोटासरा ने अपनों को ही आईना दिखा दिया.
किसी नेता को कौनसा बयान कब देना है, किस पर देना है और किस भाषा में देना है? यह सब आमतौर पर खुद नेता ही तय करते हैं. राजनीति के ये बयान आमतौर विरोधी पार्टी के नेताओं के खिलाफ दिए जाते हैं. लेकिन शहीद स्मारक पर LPG को लेकर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा ने अपने संबोधन में अपनी ही पार्टी के नेताओं को सरकार को घेरने को लेकर नसीहत भी दे दी. डोटासरा ने राज्य सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाये.
डोटासरा ने क्या कहा था
इतना ही नहीं डोटासरा ने सरकार को घेरने के साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं को भी आईना दिखाया. उन्होंने कहा कि सरकार को घेरना है तो केवल ट्विटर से ही काम नहीं चलेगा. केवल नेता खुद बैठकर आ जाए, ड्राइवर और गनमैन को लेकर आ जाए, उससे भी काम नहीं चलेगा. डोटासरा ने कहा कि हर नेता को सरकार के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा, तब जाकर ही कांग्रेस की सरकार आएगी.
राजेंद्र राठौड़ ने कहा ये भीड़ नहीं जुटा पाते
यूं तो कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना था कि डोटासरा ने अपने भाषण में सरकार पर ही निशाना साधा, लेकिन बीजेपी नेता डोटासरा के भाषण को अलग तरह से डिकोड करते हैं. पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि डोटासरा अपनी ही पार्टी के नेताओं का अपमान करने से चूकते नहीं. राठौड़ ने कहा कि पूर्व सीएम अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ही आजकल ज्यादा ट्वीट करते हैं और डोटासरा ने खुले मंच से अपनी ही पार्टी के नेताओं पर टिप्पणी कर इनकी आपसी स्थिति उजागर कर दी है.
राठौड़ ने कहा कि आजकल कांग्रेस के नेता ट्वीट करो–ट्वीट करो का खेल कर रहे हैं, जबकि जनता इनके साथ नहीं है. राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के प्रदर्शनों में भी ना तो इनका संगठन भीड़ जुटा पाता है और ना ही इनके नेता.
पीसीसी चीफ के बयान को भले ही बीजेपी कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी की तरफ मोड़ रही हो, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस के नेता भी वाकई ऐसा महसूस करते हैं? अगर वाकई ऐसा है, तो इस बयान पर कुछ और रुझान जल्द दिख सकते हैं.
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