दुर्लभ FOP बीमारी की जैसलमेर में दस्तक, राजस्थान में पहला मामला... मांसपेशियां धीरे-धीरे बन जाती है हड्डी

जैसलमेर में पहली बार एक बेहद दुर्लभ बीमारी एफओपी (Fibrodysplasia Ossificans Progressiva) का मरीज चिह्नित किया गया है. चिकित्सा जगत में यह बीमारी इतनी दुर्लभ मानी जाती है.

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Fibrodysplasia Ossificans Progressiva: राजस्थान के सीमावर्ती जिला जैसलमेर में पहली बार एक बेहद दुर्लभ बीमारी एफओपी (Fibrodysplasia Ossificans Progressiva) का मरीज चिह्नित किया गया है. चिकित्सा जगत में यह बीमारी इतनी दुर्लभ मानी जाती है कि पूरी दुनिया में इसके बहुत कम मामले दर्ज हैं. जैसलमेर में सामने आया यह मामला डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है. इस दुर्लभ बीमारी को लेकर शहर के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ दिनेश जांगिड़ ने बताया कि FOP एक आनुवंशिक और अत्यंत दुर्लभ रोग है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां, लिगामेंट और टिश्यू धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगते हैं. इसी वजह से मरीज का शरीर धीरे-धीरे जकड़ता चला जाता है और उसकी सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं.

बीमारी को स्टोन मैं सिंड्रोम भी कहते हैं

डॉ. जांगिड़ के अनुसार इस बीमारी को आम बोलचाल में “स्टोन मैन सिंड्रोम” भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस बीमारी में शरीर के अंदर दूसरी तरह का अस्थि ढांचा बनने लगता है. मांसपेशियां और सॉफ्ट टिश्यू धीरे-धीरे कठोर होकर हड्डी का रूप लेने लगते हैं, जिससे मरीज के शरीर की गतिशीलता कम होती चली जाती है.उन्होंने बताया कि यह बीमारी अक्सर बचपन में ही दिखाई देने लगती है. कई बच्चों में जन्म के समय ही इसके शुरुआती संकेत देखे जा सकते हैं, जैसे पैर के बड़े अंगूठे की असामान्य बनावट या टेढ़ापन. समय के साथ शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन या दर्द के साथ छोटी-छोटी गांठें बनने लगती हैं और बाद में ये हिस्से हड्डियों में बदलने लगते हैं.

स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं 

डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका अभी तक कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है. चिकित्सा विज्ञान में अभी केवल इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और मरीज को सावधानी के साथ जीवन जीने की सलाह दी जाती है. कई मामलों में मामूली चोट, सर्जरी या बार-बार दिए जाने वाले इंजेक्शन भी शरीर में नई हड्डी बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं. यही कारण है कि ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

15-20 लाख लोगों में से एक को होती है यह बीमारी

विशेषज्ञों का कहना है कि FOP दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारियों में से एक है. अनुमान के अनुसार यह बीमारी लगभग 15 से 20 लाख लोगों में से केवल एक व्यक्ति में पाई जाती है. वैश्विक स्तर पर अब तक इसके लगभग 700 से 800 मामलों की ही पुष्टि हुई है. भारत में भी इसके बहुत कम केस सामने आए हैं और अधिकतर मामलों की जानकारी मेडिकल रिसर्च या अस्पतालों की रिपोर्ट के माध्यम से ही सामने आती है.

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डॉ. जांगिड़ ने बताया कि इस बीमारी की सही पहचान करना भी कई बार चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि शुरुआती लक्षण सामान्य सूजन या गांठ की तरह दिखाई देते हैं. कई बार मरीज को सही बीमारी का पता चलने में काफी समय लग जाता है. इसलिए अगर बच्चों में बार-बार सूजन, दर्द या असामान्य गांठ जैसी समस्या दिखाई दे तो विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है.

जैसलमेर में सामने आया यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सीमावर्ती जिले में इस तरह की दुर्लभ बीमारी का यह संभवतः पहला चिह्नित केस है. डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे मामलों की जानकारी सामने आने से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और समय रहते मरीजों को उचित सलाह व देखभाल मिल सकती है. चिकित्सकों का कहना है कि दुर्लभ बीमारियों के मामलों में जागरूकता, सही जांच और विशेषज्ञों की सलाह ही मरीजों के जीवन को बेहतर बनाने का एकमात्र रास्ता है. जैसलमेर में सामने आया यह मामला भी इसी दिशा में चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

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