रावतभाटा स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है. रावतभाटा स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना ने 700 मेगावाट की क्षमता हासिल कर ली. इसकी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को दी. उन्होंने गुरुवार (12 फरवरी) को कहा कि सरकार देश में परमाणु संयंत्रों के चालू होने के संबंध में निर्धारित समयसीमा और सुरक्षा उपायों का पालन कर रही है. उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि देश की परमाणु क्षमता 2031-32 तक लगभग तीन गुना बढ़कर 22,380 मेगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट हो जाएगी.
10 फरवरी की सुबह हासिल की क्षमता
इसी दौरान मंत्री ने बताया कि दो दिन पहले ही हमने एक और रिकॉर्ड बनाया. रावतभाटा स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना ने 10 फरवरी को सुबह 5:30 बजे सफलतापूर्वक अपनी 700 मेगावाट की निर्धारित क्षमता हासिल कर ली. उन्होंने कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ विश्वास और ‘लीक से हटकर सोच' के कारण ही संभव हो पाया है कि परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है.
5 साल पहले यह अकल्पनीय था- मंत्री
सिंह ने कहा, करीब पांच साल पहले तक यह अकल्पनीय था. मुझे लगता है कि राष्ट्र और समाज ने यह स्वीकार कर लिया था कि हमें गोपनीयता के पर्दे के पीछे काम करना होगा. मुझे लगता है कि पहली बार हमने वैश्विक रणनीति अपनाई है.
साथ ही उन्होंने कहा कि कुडनकुलम संयंत्र (तमिलनाडु) की परिकल्पना सबसे पहले 1988 में की गई थी, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ. पहली ईंट 2002 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के कार्यकाल में रखी गई. कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की तीसरी इकाई के 2026 तक और चौथी इकाई के 2027 तक पूरी होने की संभावना है. वर्तमान सरकार के आने के बाद ही दिसंबर 2014 में कुडनकुलम संयंत्र की पहली इकाई चालू हुई.
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