अजमेर शरीफ दरगाह में अली ख़ामनेई के क़त्ल पर ताज़ियती जलसा, वैश्विक शांति की उठी आवाज

वक्ताओं ने अपने संबोधन में भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कूटनीतिक स्तर पर शांति प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया.

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Rajasthan News: अजमेर शरीफ दरगाह में दरगाह से जुड़ी खादिमों की संस्था अंजुमन सैयदजादगान की ओर से ताज़ियती जलसा आयोजित किया गया. यह श्रद्धांजलि सभा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामनेई के निधन पर शोक व्यक्त करने के उद्देश्य से रखी गई. दरगाह के आहता नूर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए. उपस्थित लोगों ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति और विश्व में अमन-चैन की बहाली के लिए सामूहिक दुआ की. आयोजन के दौरान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चिंता जताते हुए शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई.

धार्मिक नेतृत्व ने जताया दुख, एकता पर दिया जोर

जलसे में अंजुमन के पूर्व सचिव सैय्यद सरवर चिश्ती, मौजूदा सचिव सैय्यद कलीमुद्दीन चिश्ती और पूर्व अध्यक्ष सैय्यद मोइन हुसैन चिश्ती समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे. वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में मुस्लिम समुदाय को आपसी एकता और संयम बनाए रखने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि दिवंगत नेता ने हमेशा उम्मत में भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया. कार्यक्रम में दुनिया भर के मुसलमानों की सुरक्षा और स्थिरता के लिए विशेष दुआएं की गईं.

भारत-ईरान संबंधों का जिक्र, शांति की पहल की अपील

वक्ताओं ने अपने संबोधन में भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कूटनीतिक स्तर पर शांति प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात में संवाद और समझदारी ही समाधान का रास्ता है. कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने विश्व शांति, धार्मिक सौहार्द और मानवता की रक्षा के लिए सामूहिक प्रार्थना की. जलसे में दरगाह से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्यजन भी शामिल रहे.
 

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