रींगस में भैरूं बाबा के दरबार में जुटे 2 लाख भक्त, इस वजह से खास है आज का दिन

रींगस में भैरूं बाबा के दस दिवसीय मेले में रविवार को करीब 2 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. मेला पूरे परवान पर है और भव्य श्रृंगार ने भक्तों को आकर्षित किया.

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बाबा के दरबार में देर रात से ही भक्तों की भीड़ नजर आ रही है.

रींगस के श्मशान वाले  प्रसिद्ध दस दिवसीय मेला इन दिनों पूरे परवान पर है. वैसाख माह के रविवार (26 अप्रैल) को बाबा के दरबार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. बीते 24 घंटे के दौरान अब तक करीब 2 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. आस्था, परंपरा और उत्साह के इस संगम में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है. देर रात से ही देशभर से भक्त बाबा के दरबार में पहुंचना शुरू हो गए थे. श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर मनौतियां मांग रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों के साथ यहां पहुंच रहे हैं. वहीं नवविवाहित जोड़े भी परंपरा निभा रहे हैं. सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर स्थानीय पुलिस बल के साथ आरएसी के जवान बड़ी संख्या में तैनात हैं.

छोटे-बड़े हर आयोजन होते हैं खास

भैरूं बाबा का यह मेला हर साल वैसाख माह में आयोजित होता है, जिसमें छोटे और बड़े मेले का विशेष महत्व होता है. इस बार का बड़ा मेला रविवार को आयोजित हुआ, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली. 10 दिवसीय मेले के लिए भी मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है. बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया.

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अगले 4 दिन भीड़ बढ़ने की संभावना 

मेला समिति और स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिससे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें. यह मेला पूर्णिमा तक जारी रहेगा. अगले चार दिनों तक श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

इस मंदिर से जुड़ी है खास मान्यता

करीब 700 साल पुराने इस मंदिर के इतिहास के पीछे कई तरह की कहानियां सामने आती हैं. वहीं, प्राचीन ग्रंथों की मानें तो ब्रह्मा के पांचवें मुख से भगवान शिव की बुराई की गई थी. इसी बुराई के परिणामस्वरूप भगवान भोलेनाथ के पांचवें रुद्र अवतार माने जाने वाले भैरव बाबा ने ब्रह्मा के उस पांचवें मुख्य की हत्या कर दी थी.

माना जाता है कि भैरव बाबा पर उस ब्रह्महत्या का पाप लगा. उसी पाप के प्रायश्चित के लिए भगवान विष्णु के द्वारा बताएं मार्ग के अनुसार भैरव बाबा तीनों लोकों की यात्रा करने निकल पड़े. कहा जाता है कि उनकी यह यात्रा यही रींगस से शुरू हुई थी. मंदिर के 14 पीढ़ियों से पूजा अर्चना कर रहे पुजारी (भोपा, गुर्जर) परिवार भी इसी बात को मानते हैं.

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