Kamlesh Prajapati Encounter Case: बाड़मेर के बहुचर्चित कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने तत्कालीन बाड़मेर एसपी रहे आनंद शर्मा सहित 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत प्रदान की है. सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि घटना के दौरान कमलेश प्रजापति ने भागने का प्रयास करते हुए पुलिस टीम पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की थी.
कोर्ट ने ये भी माना कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग आत्मरक्षा और एक हेड कांस्टेबल की जान बचाने के उद्देश्य से की गई जवाबी कार्रवाई थी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस घटना को फर्जी एनकाउंटर नहीं माना जा सकता.
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2021 को बाड़मेर जिले के सदर थाना क्षेत्र में कमलेश प्रजापति का पुलिस एनकाउंटर हुआ था. घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे. तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और प्रजापति समाज के लोगों की मांग पर राज्य सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी.
ट्रायल कोर्ट ने क्यों खारिज की थी रिपोर्ट?
सीबीआई ने अपनी जांच में पुलिस कार्रवाई को सही मानते हुए पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दी थी और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी. हालांकि, कमलेश प्रजापति की पत्नी ने इस क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी थी. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व न देते हुए क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर हत्या का संज्ञान ले लिया था.
सेशन कोर्ट ने निरस्त किया ट्रायल कोर्ट का आदेश
ट्रायल कोर्ट के इसी आदेश के विरुद्ध आईपीएस आनंद शर्मा और अन्य पुलिसकर्मियों ने सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की थी. मामले की सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत प्रदान की है. इस फैसले को बाड़मेर के बहुचर्चित एनकाउंटर मामले में पुलिस पक्ष के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है.