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This Article is From Mar 10, 2026

Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च कब है बसौड़ा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और क्यों इस दिन भूलकर भी नहीं जलाते चूल्हा?

sheetla ashtami kab hai 2026: शीतला अष्टमी 2026 का राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विशेष महत्व है. इस बार इस त्योहार को मनाने को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, जिसके कारण लोग जानना चाहते है कि आखिर किस स्थिति, शुभ मुहूर्त में माता शीतला का पूजा की जाएगी. 

Sheetala Ashtami 2026:  11 या 12 मार्च कब है बसौड़ा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और क्यों इस दिन भूलकर भी नहीं जलाते चूल्हा?
Sheetala Ashtami 2026
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Sheetala ashtami 2026 date: शीतला अष्टमी 2026 (बसौड़ा) का राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विशेष महत्व है. इस पर्व को होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. इस दिन माता शीतला की पूजा(Sheetala Ashtami) की जाती है, जो संक्रामक और चर्म रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं. इस दिन मुख्यत: व्रती और उसका परिवार एक दिन पहले बना बासी 'ठंडा खाना' खाते है. इसलिए इसे बसौड़ा (Basoda 22026) भी कहा जाता है.  लेकिन इस बार इस त्योहार को मनाने को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, जिसके कारण लोग जानना चाहते है कि आखिर किस स्थिति, शुभ मुहूर्त में माता शीतला की पूजा की जाएगी. 

11 मार्च को मनाई जाएगी शीतला अष्टमी

पंचाग के अनुसार यह पर्व कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है. जो इस साल 2026 को 11 मार्च, बुधवार को मनाया जा रहा है. इसी दिन लोग बासी खाने से माता शीतला का पूजन कर उन्हें प्रसन्न कर परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे.

Sheetala Ashtami को बसौड़ा क्यों कहते है

शीतला अष्टमी को 'बसौड़ा' कहने के पीछे मुख्य कारण 'बासी भोजन' की परंपरा है. शब्द 'बसौड़ा' मूल रूप से हिंदी शब्द 'बासी' (Stale) से बना है.इस त्यौहार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता और न ही चूल्हा जलाया जाता है. माता शीतला को एक दिन पहले (सप्तमी की रात) बनाया गया भोजन अर्पित किया जाता है. चूंकि यह भोजन 'बासी' होता है, इसलिए लोक भाषा में इस उत्सव का नाम 'बसौड़ा' या 'बसोड़ा' पड़ गया.

 बसौड़ा पूजन का शुभ मुहूर्त

बसौड़ा के दिन शीतला माता की पूजा करने के लिए अष्टमी तिथि 11 मार्च को सुबह 1:54 बजे से शुरू होकर 12 मार्च को सुबह 4:19 बजे तक रहेगी और फिर अष्टमी तिथि खत्म हो जाएगी. इस बीच, पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक है. इस मुहूर्त में पूजा करने से माता शीतला घर से बीमारियों को दूर रखती हैं.

शीतला माता की पूजन और विधि 

 पूजा में बासी (ठंडा या पुराना) भोजन चढ़ाने का विधान है, इसलिए इसे बासोड़ा भी कहते हैं. भक्त इस दिन देवी से परिवार के स्वास्थ्य की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि बसौड़ा पूजन से घर में रोग-व्याधि दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है. बसौड़ा पूजन 10 और 11 मार्च को है.

क्यों मनाया जाता है बसौड़ा

होली खत्म होने के साथ ही फाल्गुन महीना खत्म होने नजदीक होने के और चैत्र की शुरुआत होने वाली होती है, जिसमें गर्मी अपने चरम पर होती है. ऐसे में चेचक, खसरा और त्वचा जैसे संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ने लगता है. प्राचीन मान्याताओं के अनुसार माता शीतला को आरोग्य की देवी माना जाता है. हिंदू धर्म में उन्हें विशेष रूप से संक्रमण और ताप (गर्मी) से होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने वाली शक्ति माना गया है.

 माता शीतला को क्यों माना जाता है आरोग्य की देवी

माता शीतला को आरोग्य की देवी मानने के लिए पीछे गहरे धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक तर्क हैं.पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ज्वरासुर (ज्वर/बुखार का असुर) ने दुनिया में घातक बीमारियां और तेज़ बुखार फैला दिया था, तब माता कात्यायनी ने शीतला का रूप धारण किया था.उन्होंने ज्वरासुर को पराजित कर बच्चों और निर्दोषों के रक्त को शुद्ध किया और उनके शरीर की जलन को शांत किया. इसीलिए उन्हें बुखार और संक्रामक रोगों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है.

 वैज्ञानिक तर्क ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य

बसौड़ा (शीतला अष्टमी) होली के बाद आती है, जब मौसम तेजी से  सर्दियों से गर्मियों की ओर बदलता है.यह समय संक्रामक रोग फैलने का सबसे अच्छा जरिया माना गया है.  इस दिन ठंडा भोजन (बासी भोजन) खाने की परंपरा हमें यह सिखाती है कि अब चूल्हा (गर्मी) कम करना है और शरीर को ठंडी तासीर वाली चीजों की ओर ले जाना है.

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