आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ाएं या नहीं? गुजरात HC के जजों की अलग-अलग राय, चीफ जस्टिस के पास पहुंची फाइल

Asaram Bail Update: आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ानी चाहिए या नहीं, इस पर फैसला अब गुजरात के चीफ जस्टिस को लेना है.

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आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ाने पर अब गुजरात के चीफ जस्टिस फैसला लेंगे.

Asaram Bail News: रेपिस्ट आसाराम को मेडिकल ग्राउंड पर मिली 31 मार्च तक की अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाना चाहिए या नहीं, इसे लेकर गुजरात हाई कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अलग-अलग राय पेश की है. पहले जस्टिस 3 महीने का एक्सटेंशन देने के पक्ष में हैं. वहीं दूसरे जस्टिस अंतिरम जमानत को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं. इस वजह से अब यह फाइल गुजरात के चीफ जस्टिस के पास पहुंच गई है. चीफ जस्टिस से निर्देश मिलने के बाद याचिकाकर्ता को फैसला सुना दिया जाएगा.

जमानत बढ़ी तो राजस्थान HC में लगेगी अगली याचिका

आसाराम ने गांधीनगर दुष्कर्म केस में 6 महीने की स्थाई जमानत मांगी है. इस केस पर 25 मार्च को गुजरात हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी, और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. 28 मार्च को जस्टिस ने फैसला पढ़ा, जिसमें असमंजस की स्थिति बनने पर यह गुजरात के चीफ जस्टिस के पास भेज दिया गया. अगर जमानत अवधि बढ़ती है तो आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से भी जमानत बढ़वानी होगी. क्योंकि जोधपुर दुष्कर्म केस में भी वो दोषी है और कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई हुई है.

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जमानत के लिए कोर्ट में मौलिक अधिकारों का हवाला

आसाराम ने जमानत अवधि बढ़वाने के लिए गुजरात हाई कोर्ट में कई तरह की मेडिकल रिपोर्ट पेश की है. उसने मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि वह 86 साल का है और दुनिया में बहुत कम लोग 75-80 वर्ष की आयु के बाद कोई इनवेसिव सर्जरी सहन कर पाते हैं. उसने बताया कि भारतीय संविधान के तहत दोषियों के भी अपने अधिकार होते हैं. यदि कोई व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इलाज की आवश्यकता महसूस करता है, तो यह अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत आता है.

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आसाराम ने तर्क दिया कि सिर्फ इसलिए कि आरोप गंभीर हैं और मैं आजीवन कारावास भुगत रहा हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि यदि मृत्यु आए तो उसे जल्द लाया जाए. यदि अच्छे इलाज से इसे टाला जा सकता है, जिसकी मुझे आवश्यकता है, तो भारतीय संविधान के तहत दोषियों को भी यह अधिकार प्राप्त है.

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आसाराम को क्या बीमारी है?

एम्स जोधपुर की एक रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम को कोरोनरी आर्टरी डिजीज है, इसलिए वह "हाई रिस्क श्रेणी" में आता है. इन रिपोर्टों के अनुसार, आसाराम को विशेष नर्सिंग देखभाल, करीबी निगरानी, नियमित रूप से एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श की आवश्यकता है. आसाराम की वकील के मुताबिक, आसाराम की कई मेडिकल जांच की गई हैं और सभी विशेषज्ञों की सलाह और रिपोर्ट में कम से कम एक बात समान है कि यह एक घातक स्थिति है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आवेदक की स्थिति या स्वास्थ्य बिल्कुल भी ठीक नहीं है.

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